डॉक्टर रागिनी स्वर्णकार, शर्मा की कृति 'नित्यश्री' का लोकार्पण हुआ
इंदौर। काव्य धारा अभा साहित्यिक समूह का सातवाँ वार्षिक अधिवेशन 24 अगस्त 2025 रविवार को मध्य भारत हिंदी साहित्य समिति इंदौर के सभागृह में सम्पन्न हुआ ।
जिसमें आठ पुस्तकों व दो साझा साहित्यिक संकलनों का लोकार्पण एवं विराट अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ।संस्था की अध्यक्ष सुनीता लुल्ला,अध्यक्षता अंतरराष्ट्रीय कवि प्रोफेसर डॉ . राजीव शर्मा जी ने की।
मुख्य अतिथि वरिष्ठ शायर विज्ञानव्रत जबकि श्री विजय बागरी, हरेराम वाजपेई एवं डॉ श्याम मनोहर सीरोठीया विशेष अतिथि रहे।. जिन पुस्तकों का विमोचन हुआ डॉ रागिनी स्वर्णकार शर्मा की 'नित्यश्री' जो शब्दाहुति प्रकाशन दिल्ली द्वारा प्रकाशित की गई है।
गीता अग्रवाल की काव्य तरणी, शायर विज्ञान व्रत की सामने है आईना, पायल शर्मा की तर्पण, रश्मि शर्मा की निशि गंधा, डॉ संजीव धानुका की छोटे छोटे डग, मंजू राठी की मनन का कथन, मनोरमा शर्मा मनु की दरखतों के साये के अलावा दो साझा संकलनों किसलय एवं मनीषा का विमोचन हुआ।. इंदौर के साहित्य जगत में पहली बार दस पुस्तकों का एक साथ विमोचन सम्पन्न हुआ है।पुस्तकों के विमोचन के साथ ही विराट अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन भी हुआ।जिसमें देश के वरिष्ठ व ख्यातलब्ध कवियों ने काव्य पाठ किया। ज्ञातव्य है कि साहित्य मनीषियों का काव्य धारा साहित्यिक समूह विगत आठ वर्षों से साझा संकलनों के माध्यम से साहित्य की सेवा कर रहा है।
द्वितीय सत्र में काव्यपाठ हुआ।देश भर के क़लम साधको ने एक से बढ़कर एक रचनाएँ प्रस्तुत कीं
कुछ पंक्तियाँ
डॉक्टर रागिनी स्वर्णकार शर्मा ने कहा---
शब्द जो भी बाँच दूं वह जीत हो जाए
काश उनको यूं अदब से प्रीत हो जाए
रागिनी बन थाह लूँ लय ताल छंदों की
यू प्रणय के आचमन की रीत हो जाए
हवाओं के कई ख़त साज़िशों के नाम आये हैं,
सुनहरा दौर है फिर भी ज़हर के जाम आये हैं,
कभी शब को शिकायत तो कभी है भोर को शिकवा,
मेरे हिस्से में औरों के भी कुछ इल्ज़ाम आये हैं ।।
ब्रजेश शर्मा ,झाँसी
नाम लिखकर किताबों में रख आए हैं।
एक काँटा गुलाबों में रख आए हैं ।
-- जयकृष्ण चांडक, हरदा
तन, मन, धरती-अंबर से भी विलग कोई सत्ता होगी,
मोहक पथ का पागल पंछी
कब अन्वेषण करता है।
---पायल शर्मा, राजस्थान
तुम हृदय से निमन्त्रण.
तो देते प्रिये
---रश्मि शर्मा, उदयपुर
कैसे मैं लौट जाऊँ अरे बीच राह में
उस मोड़ पर खड़ा कोई इन्तजार कर रहा है।
---हरेराम बाजपेयी ,इंदौर
राख से मेरी चिता की कुछ मिलेंगी अस्थियाँ
तुम बचा लेना बनाकर, बज्र अपनी बस्तियाँ'
---सत्य प्रसन्न
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शानदार समाचार हेतु आभार
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