हमारे दैनिक जीवन में प्रौद्योगिकी का महत्व
- पद्मा मिश्रा
समय परिवर्तनशील है।समय के साथ साथ जीवन की मूलभूत आवश्यकताए भी बदलती हैं और हमारी मान्यताओं परंपराओं तथा जीवन शैली में भी परिवर्तन आता है। आवश्यकता आविष्कार की जननी.है के अनुसार नये नये वैज्ञानिक अनुसंधानों ने हमारे दैनिक जीवन की दमा और दिशा ही बदल दी है। फलस्वरूप जीवन यापन को सरल सहज और सुगम बनाने के लिए
हमने प्रौद्योगिकी को अपनाया है। क्योंकि आज का समय.निरंतर वैश्विक चुनौतियोः और प्रगति के साथ आगे बढ जाने का है।ठहरना कोई नहीं चाहता।
यह नीड मनोहर कृतियों का
यह विश्व बना रंगस्थल है
है परंपरा लग रही यहां
ठहरा जिसमें जितना बल.है।
आज के आधुनिक युग को यदि हम प्रौद्योगिकी का युग” कहें तो यह पूर्णतः उचित होगा। प्रौद्योगिकी ने मानव जीवन के प्रत्येक क्षेत्र को स्पर्श किया है। जहाँ पहले कार्य करने में समय, परिश्रम और साधनों की अधिक आवश्यकता होती थी, वहीं आज विज्ञान और तकनीकी साधनों ने सब कुछ त्वरित और सरल बना दिया है। जैसा कि महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने कहा है— *“It has become appallingly obvious that our technology has exceeded our humanity.”* अर्थात् तकनीक ने हमारी सीमाओं से आगे निकलकर जीवन को नई दिशा दी है।
संचार के क्षेत्र में तकनीक का योगदान अभूतपूर्व एवं आश्चर्यजनक है।पहले पत्रों और संदेशवाहकों के माध्यम से सूचना का आदान-प्रदान होता था, जिसमें कई दिन लगते थे। आज इंटरनेट, मोबाइल फोन, ई-मेल और वीडियो कॉल ने पूरे विश्व को एक “वैश्विक गाँव” बना दिया है। मार्शल मैक्लुहान ने ठीक ही कहा है— *“The new electronic interdependence recreates the world in the image of a global village.”*
*शिक्षा के क्षेत्र* में भी तकनीक ने कई नए आयाम जोड़े हैं। शिक्षा के मूलभूत स्रोतों की अपेक्षा इंटरनेट के माध्यम से आनलाइन कक्षाएँ, ई-पुस्तकालय, शैक्षणिक एप्स और स्मार्ट क्लासेस ने ज्ञान को सबके लिए सुलभ बना दिया है। छात्र और अध्यापकों के लिए तो यह प्रौद्योगिकी राम वाण सिद्ध हुई है। और अध्यापक सुदूर क्षेत्रों में भी अपने व्याख्यान और अध्यापन से शिक्षा प्रदान कर रहे हैं।चिकित्सा के क्षेत्र में भी अनोखी क्रांति आई है।वरिष्ठ विशेषज्ञ डाक्टर्स से परामर्श और इलाज की सुविधा मेडिकल संबंधी सुविधाओं के आदान प्रदान में भी उपयुक्त सुधार आया है।
कोविड-19 महामारी इसका सशक्त उदाहरण है, जब तकनीक ने शिक्षा की धारा को रुकने नहीं दिया। महात्मा गांधी ने कहा था— “Live as if you were to die tomorrow. Learn as if you were to live forever.”* आज की तकनीक इस सीखने की निरंतर प्रक्रिया को संभव बना रही है।
ईस तकनीक का महत्व असाधारण है। आधुनिक उपकरणों, मशीनों और दवाओं के कारण रोगों की पहचान और उपचार सरल हुआ है। टेलीमेडिसिन जैसी सुविधाओं ने दूर-दराज़ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित की है। वास्तव में, प्रौद्योगिकी ने “स्वास्थ्य ही धन है” को और अधिक सार्थक बना दिया है।
हमारे दैनिक जीवन में भी तकनीक ने गहरी पैठ बनाई है। आज टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, स्मार्टफोन और इंटरनेट जैसी सुविधाओं ने जीवन को आरामदायक और आधुनिक बना दिया है। तकनीक न केवल समय की बचत करती है, बल्कि जीवनशैली को भी परिष्कृत करती है।
व्यापार और रोजगार की दुनिया भी इससे अछूती नहीं है। डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन शॉपिंग, ई-कॉमर्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने नए अवसरों का सृजन किया है। जैसा कि बिल गेट्स ने कहा है“The advance of technology is based on making it fit in so that you don't really even notice it, so it's part of everyday life.”* आज यह कथन पूर्णतः सत्य प्रतीत होता है।
फिर भी, तकनीक का अत्यधिक उपयोग हमें कुछ चुनौतियाँ भी देता है। मोबाइल और कंप्यूटर पर अधिक निर्भरता स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकती है। साथ ही साइबर अपराध और निजता की सुरक्षा भी बड़ी चिंताएँ बन चुकी हैं। अतः यह आवश्यक है कि तकनीक का उपयोग संतुलित और विवेकपूर्ण ढंग से किया जाए।
सचमुच आज तकनीक और संचार प्रणाली हमारे दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बन चुकी है। यह हमें समय की बचत, ज्ञान का विस्तार, कार्य में दक्षता और जीवन में सहजता प्रदान करती है। यदि हम इसे सकारात्मक दिशा में प्रयोग करें तो निश्चय ही तकनीक मानवता के लिए वरदान सिद्ध होगी। जैसा कि जयशंकर प्रसाद कहते हैं-
शक्ति के विद्युतकण जो व्यस्त विकल बिखरे ।
ऐंड हो निरुपाय समन्वय
उनका करे समस्त ,
विजयिनी मानवता हो जाय।
- पद्मा मिश्रा.जमशेदपुर
.jpg)
