गरबा गीतों मे भी समाया है खगोलविज्ञान – सारिका
नर्मदापुरम । आधा है चंद्रमा ,रात आधी इस गीत पर गरबा करते हुये शायद ही कोई सोचता है कि इसके शब्दों में खगोलविज्ञान समाया हुआ है । गरबा के उत्साह में भी नायिका द्वारा खगोलविज्ञान को ध्यान में रखा गया था जो कि आज की युवा पीढ़ी के लिये अब मात्र एक लोकप्रिय धुन के रूप में ही रह गया है । इस प्रकार के गीतों के छिपे खगोलविज्ञान की जानकारी देते हुये नेशनल अवार्ड प्राप्त विज्ञान प्रसारक सारिका घारू का कहना है कि आज की चकाचौंध वाली लाईटिंग और साउंड में हम आकाश में उपस्थित खगोलीय प्रकाश के स्त्रोत चंद्रमा की तरफ ध्यान ही नही देते हैं।
सारिका ने बताया कि नवरात्रि के आरंभ प्रतिपदा के बाद आकाश मे प्रतिशाम पश्चिम दिशा से चंद्रमा आकाश मे उदित हुआ दिखता है और उसकी आकाश में उपस्थिति लगभग 40 से 50 मिनिट बढ़ती जाती है ।
दूज की शाम वह लगभग 90 मिनिट तक आकाश में रहता है और हंसियाकार पतला होता है तो चतुर्थी को लगभग 180 मिनिट तक रहकर लगभग एक चौथाई भाग चमकता है तो अष्टमी को इसकी उपस्थिति लगभग 360 मिनिट या 6 घंटे तक होती है और इसका आकार लगभग आधा होता है और संभवत: यह गीत अष्टमी की रात्रि पर गरबा करते हुये की स्थिति का वर्णन है ।
सारिका ने कहा कि अब आप सोच रहे होंगे कि इसके बाद चंद्रमा का आकार आगे भी बढ़ता रहता है , तो आपका विचार सही है 15 वे दिन यह आकाश में लगभग 12 घंटे रहता है और आकार बढ़ते हुये पूरा हो जाता है । तब शरद पूर्णिमा पर गरबा करते हुये नायिका का गीत होता है पूनम की प्यारी-प्यारी रात. ..आज तू मत जाना। इसमे नायिका सूरज से न निकलने का आग्रह कर रही है अर्थात उसे मालूम है कि चंद्रमा तब तक रहेगा जब तक कि सूर्योदय नहीं होगा ।
दिनांक तिथि आकाश में उपस्थति चंद्रमा का आकार
24 सितंबर तृतीया 1घंटा 33 मिनिट 6 प्रतिशत
27 सितंबर पंचमी 3 घंटा 28 मिनिट 26.6 प्रतिशत
30 सितंबर अष्टमी लगभग 6 घंटे 55.6 प्रतिशत
06 अक्टूबर शरदपूर्णिमा लगभग 12 घंटे 99.7 प्रतिशत
- सारिका घारू
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