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लघुकथा : कन्या पूजन - नीता श्रीवास्तव श्रद्धा , भोपाल


 लघुकथा : 

कन्या पूजन 

  विवाह पश्चात् ससुराल में शिखा की यह पहली चैत्र नवरात्र थी । मायके में भी पूजा पाठ होता था परंतु ससुराल में पूजा पाठ की भव्यता कुछ अधिक थी ।

बहुत कुछ बातें तो पति देव ने पहले ही बता दी थी तो सुबह -सुबह शिखा नहाकर रसोई में आकर फलहार की तैयारी में जुट गई । कमला बाई को पहले ही मना कर दिया था कि इन नौ दिनों में रसोई की साफ़ सफ़ाई बहुरानी ही सँभालेंगी। 

आज कमला बाई अपनी तीन साल की छोटी बेटी को भी साथ ले आयी थी ।सासु माँ ने उसे देखते ही कहा “चलो अच्छा हुआ कन्या रूप में देवी भी आ गईं। कर्म कांड के साथ कन्या भोजन से पूजा पूरी हो जाती है ।”

सुनो शिखा ,“मैं तो पूजा में बैठ रही हूँ तुम कमला बाई से कहकर बच्ची के पैर धुलवा देना। तुम बच्ची को छूना मत! 

तुम्हें भी पूजा करनी है ।और फलाहार बनने के बाद एक थाली भोग की रख देना और इस बच्ची को एक अलग थाली में फलाहार दे देना ।दूर से रोली अक्षत छिटककर उसे पैसे भी दे देना।”

सासू माँ के निर्देश सुनकर शिखा अवाक रह गयी!!!परंतु शिक्षिका होने के नाते उसके मन की कसमसाहट ऊपर आ ही गई और भविष्य में गलती का दोहराव न हो इसलिए बोल ही पड़ी,”माँ जी हम देवी कन्या स्वरूप का पूजन कर रहे हैं या कर्मकांड का आडंबर ?”

 - नीता श्रीवास्तव श्रद्धा , भोपाल

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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