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काव्य : उपहार , माता पिता की दुआएं - श्रीमती प्रतिभा दिनेश कर ,सरायपाली


 काव्य : 

उपहार - माता पिता की दुआएं


खुशियों से महक उठता सारा घर आँगन।q

,बच्चों की हँसी से रोशन हो सारा  जीवन।।


सपनों की ऊँचाई छूते रहें हरदम,।

माता पिता की दुआएं होती हर पल बच्चों के संग।। 


नौं माह तक मां के गर्भ मे पलकर।

जब आते धरती पर आंखे खोलकर।।


मां की आँखें भर आती है ।

जब वो अपने बच्चे को सीने से लगाती है।।


मां के जीवन का एक यही लक्ष्य ।

बच्चे हो उनके आंखों के समक्ष।।


उनके दीर्घायु,सफलता,स्वस्थ्य की करती कामना ।

यही होती है एक मां की सर्वोच्च मनोकामना।।


जीवन में सफलता के कदम चूमते चलो।

जीवन के मीठी मीठी राहों में झूमते चलो।।


बस एक यही होता माता पिता का अरमान।

बच्चों से बने  माता पिता की  पहचान ।।


ताउम्र नहीं होती उतनी क्षमता ।।

पर सबसे ऊंची होती एक मां की ममता ।।।


मुस्कुराते रहो जीवन में हरदम ।।

जीवन में सदा रहे खुशियां और उमंग।।


रखना हौसला आयेगी बहार ।

बच्चों को मिलता स्नेह दुलार अपार ।


 - श्रीमती प्रतिभा दिनेश कर 

विकासखण्ड सरायपाल१

 जिला महासमुंद छqत्तीसगढ़

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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