हिंदी हमारी मानसिकता स्वाधीनता का पर्व - डाॅ. चंचला दवे
हिंदी हमारी आत्मा है - डाॅ.अजय तिवारी
जो भाषा जनमानस में लोकप्रिय होती है वही भाषा सार्थक है - प्रो.आनंद तिवारी
सागर। हिंदी दिवस पर श्यामलम् संस्था द्वारा शास. कन्या महा विद्यालय सागर की सहभागिता में सम्मान एवं व्याख्यान माला का बारहवां वार्षिक आयोजन किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्ष डॉ चंचला दवे ने अपने उद्बोधन में कहा कि हिंदी हमारी मानसिक स्वाधीनता का पर्व है, हम हिंदी भाषा के सौंदर्य को मानव हृदय के अंतरमन मेें प्रतिष्ठित करें, जिससे भाषा का सशक्तिकरण होता रहे और हिंदी राष्ट्र के अभिषेक का कलश बने।हिंदी साहित्य के पितामह भारतेंदु हरिश्चंद्र कहे जाते हैं आज उनका भी जन्मदिन है।हिंदी साहित्य में कालों की गणना की जाती है तब आधुनिक काल की शुरुआत यहीं से ही मानी जाती है। आज हिंदी इंटरनेट की भाषा है अनेक लोगों की रोटी और रोजी का साधन है और इंटरनेट के माध्यम से दूसरे देशों तक हिंदी ने अपनी उड़ान भरी है और राष्ट्रभाषा की घोषणा शासन के द्वारा हो ना हो स्वयं ही राष्ट्रभाषा के रूप में यह विश्व में स्थापित हो चुकी है। कोई भी देश तब तक उन्नति नहीं कर सकता जब तक वह अपनी भाषा में बात नहीं करता।
मुख्य वक्ता प्रोफेसर आनंद तिवारी जी अपने व्याख्यान में कहा आज श्यामलम संस्था पितृपक्ष के उपलक्ष में जगत के पीताओं का तर्पण का कार्य कर रही है और गुरुकुल की परंपरा का निर्वाह कर रहे हैं ।उन्होंने हां कि अक्षर, शब्द, वाक्य और वाक्यांश इन सबसे ही भाषा बनती है शब्द सोच विचार और अवधारणा की मात्रा अभिव्यक्ति नहीं है। प्रेम और वात्सल्य को प्रकट करने वाली शक्ति होती है। शब्द नाद है, स्पंदन है और जो भाषा जनमानस में लोकप्रिय होती है वही भाषा सार्थक है। हिंदी मां जैसी सुंदर है।
मुख्य अतिथि स्वामी विवेकानंद विश्व विद्यालय के कुलाधिपति श्री डॉ अजय तिवारी ने कहा हिंदी हमारी आत्मा है धन संपत्ति की गणना है ज्ञान विज्ञान पूजा विधान है पुरुषार्थ है राष्ट्रपति को हम सब ज्ञापन भेजें और हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाया जाए शब्द भाषा माधुरी होना चाहिए हम साहित्य दूसरों के लिए लिखते हैं और वह दूसरे भी इसे पढ़े तभी हमारा साहित्य सार्थक है।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की पूजा अर्चना और कवि अरुण दुबे द्वारा मधुर सरस्वती वंदना की प्रस्तुति के साथ हुआ, आरंभ में श्यामलम अध्यक्ष उमाकांत मिश्र ने स्वागत उद्बोधन दिया एवं हिंदी दिवस पर आयोजित कार्यक्रम की रूपरेखा पर प्रकाश डाला ।अतिथियों का स्वागत अंबिका यादव एवं अंजना चतुर्वेदी तिवारी द्वारा पुष्पहार पहनाकर किया गया।
सुश्री संध्या सरवटे के जीवन परिचय का वाचन कहानीकार आर के तिवारी द्वारा किया एवं सम्मान पत्र का वाचन वरिष्ठ साहित्यकार सुश्री शरद सिंह द्वारा किया गया, संस्था अध्यक्ष एवं उपस्थित अतिथियों ने सुश्री संध्या सरवटे का पुष्पहार साल, श्रीफल एवं सम्मान निधि के साथ सम्मानित किया।
हिंदी सेवी सम्मान से सम्मानित मराठी और हिंदी की लेखिका सुश्री संध्या सर्वटे ने अपने विचार रखते हुए हिन्दी दिवस पर शुभकामनायें देते हुए संस्था का आभार व्यक्त किया।
सम्मान की इस बेला मेें डॉ घनश्याम भारती को प्रख्यात साहित्यकार कवि स्व.निर्मल चंद निर्मल की स्मृति में निर्मल साहित्य अलंकरण 2025 से अलंकृत किया गया उनके जीवन परिचय का वाचन कवि मुकेश तिवारी ने किया एवं डाॅ भारती के सम्मान पत्र का वाचन डॉ नलिन निर्मल द्वारा किया गया इसके उपरांत डॉ घनश्याम भारती को पुष्पहार पहनाकर शाल, श्रीफल, सम्मान पत्र एवं सम्मान निधि के साथ सम्मानित किया गया।
अपने उद्बोधन में डाॅ भारती ने कृतज्ञता व्यक्त करते हुए डा.नलिन निर्मल को हार्दिक धन्यवाद दिया और कहा कि डाॅ.नलिन अपने पिता की स्मृति को पुरस्कार के माध्यम से जीवंत बनाए हुए हैॅ।कार्यक्रम का सुचारू व व्यवस्थित संचालन आर्ट्स एवं कॉमर्स कॉलेज के प्रोफेसर अमर जैन ने तथा आभार प्रदर्शन कन्या महाविद्यालय की प्राध्यापक डॉक्टर अंजना चतुर्वेदी तिवारी ने किया।
इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार लक्ष्मी नारायण चौरसिया,डा.गजाधर सागर, शिवरतन यादव,टीकाराम त्रिपाठी, डा सुखदेव वाजपेयी, कुंदनलाल पाराशर, कपिल बैसाखिया,श्रीमती निरंजना जैन, दामोदर अग्निहोत्री, रविन्द्र सिलाकारी, ऋषभ भारद्वाज, हरीसिंह ठाकुर, के एल तिवारी अलबेला,डाॅ मनोज श्रीवास्तव, मोह.शरीफ, मुकेश निराला, डॉ.अनिल जैन, अमित चौबे, प्रभात कटारे, पुष्पेंद्र दुबे कुमार सागर, डॉ विजयलक्ष्मी दुबे,श्रीमती अर्चना प्यासी, डॉ नम्रता फुसकेले, श्रीमती सुनीला सराफ, श्रीमती नीलिमा पिंपलापुरे, ममता भूरिया,हर्षिता सिंह,राजेश दुबे,राजेन्द्र दुबे, एडव्होकेट विजय सर्वटे, वीरेन्द्र प्रधान,वी पी पाठक,नीरज मिश्र, कपिल चौबे, डा.नरेन्द्र प्यासी,नगर प्रचारक मनोज पांडे, डॉ.अभय सिंह,शिवप्रसाद सैनी , सुरेंद्र श्रीवास्तव, शुभांशु दुबे सहित हिंदी प्रेमियों एवं साहित्यकारों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।
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