काव्य :
पूज्य अम्मा माता अमृतनंद मयी देवी के 72 वें अमृतवर्षम पर,
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हर युग माँ बस तुमको...
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माँ तुम कितनी उपकारी हो,
माँ दुःखहरणी सुखकारी हो.
माँ तुम...
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शिक्षा, स्वास्थ्य मांगता कोई,
संतान, शक्ति चाहता कोई,
घर,वाहन,धन, जीवन साथी
जॉब, प्रमोशन के अभिलाषी
कामना पूरी करवाती हो. माँ तुम कितनी...
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भय व क्रोध शमन कोई चाहे,
काम व्यथा से मुक्ति माँगे,
स्वर्ग को चाहें ये सन्यासी,
सब कुछ दिलवाने वाली हो.
माँ तुम....
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नव शिशु आशीष नित्य प्रदाती, नव युगलों को पथ बतलाती.
स्वजन निधन पर धीर बंधाती, सब कुछ संग संग कर पाती हो. माँ तुम.....
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ममता, नेह नयन में माँ के,
हर्ष, उल्लास हृदय में माँ के,
करुणा,सांत्वना संग साथ है,
विष्णु संग शिव बन जाती हो
माँ तुम कितनी....
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हर युग माँ बस तुमको चाहे,
ग्राम,नगर, रज चरनन चाहें,
भूमण्डल की अलौकिक निधि जो, प्यारी अम्मा कहलाती हो.
माता रानी कहलाती हो.
जग अम्बे माँ कहलाती हो.
माँ तुम कितनी उपकारी हो.
इंजी. अरुण कुमार जैन
संपर्क //अमृता हॉस्पिटल, सेक्टर 88,फ़रीदाबाद, हरियाणा.
मो. 7999469175
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