गीतों ग़ज़लों के विविध रंग बिखरे काव्य चौपाल में
भोपाल । अंतरराष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच की मध्य प्रदेश इकाई द्वारा काव्य चौपाल का आयोजन 25 सितंबर को गुड शेफर्ड कॉलोनी में लघु लकथा शोध केंद्र पर आयोजित किया गया। काव्य चौपाल द्वारा आयोजित अनौपचारिक बैठक की यह शाम कविताओं, गीतों व ग़ज़लों के विविध रंगों से रंगी दिखी व कविताओं से सजी। इस काव्य चौपाल में कविताओं का मिश्रित स्वरूप दिखाई दिया ।कार्यक्रम की शुरुआत में संतोष श्रीवास्तव जी ने सभी का आत्मीय स्वागत किया व संचालन के लिए विश्व मैत्री मंच की मध्यप्रदेश इकाई की अध्यक्ष , शेफालिका श्रीवास्तव को आमंत्रित किया । शेफालिका श्रीवास्तव ने चंद पंक्तियों में कविता की परिभाषा दे कर कार्यक्रम की शुरुआत की व सरस कुशल संचालन किया ।
शब्द शब्द क़तार बने तो सृजन गीत का होता है ,
भावनाओं के अतिवेग परिलक्षित हों तो गीत सृजन का होता है ।
विचारों का जब ह्रदय में मंथन हो तब अंतर्मन कुछ साहस दिखलाता है,
रच लेता है कुछ मन के भाव , भावमयी सृजन हो जाता है ।
कार्यक्रम की शुरुआत में डॉ. नीलिमा रंजन ने अपनी कविता “ चीर हरण “ आध्यात्मिक स्वरूप की कविता सुनाई ।
चीरहरण- हर युग में
उठो द्रौपदी,
तुम हो स्त्री, महाकाली,
दण्डित करो
करोगी तुम! करोगी तुम!
विजयी हो! विजयी हो
तत्पश्चात सरोज लता सोनी ने माँ की आराधना में देवी गीत प्रस्तुत किया-
माँ तो सबकी माँ होती है,
यह जाने दुनिया सारी.....
नौ रूपों में नहीं सिमटती ,
माँ के रूप हजारी......
डॉ. क्षमा पांडेय ने “ मानव" शीर्षक से बहुत ही मधुर स्वर में काव्य पाठ किया व समाँ बांध दिया ।
मुखौटे फेंक दें नकली
बनें इंसान के खातिर।
लगे हममें कि कोई तो
अभी इंसान है असली ।
जया आर्य ने प्रेम रस में पगी कविता बहुत ही आकर्षक अंदाज में पढ़ी व श्रोता गणों की तालियाँ बटोरी ।
सांसें
सांसे थमी हुई सी हैं,
राहें थमी हुई सी है,
मत पुकारो मुझको,
धड़कन थमी हुई सी है।
मधूलिका सक्सेना , मधु आलोक “ ने वर्षा ऋतु पर आधारित कविता “दामिनी “अपने अनूठे अंदाज़ में पढ़ी व सबका मन मोह लिया ।
दामिनी दमकी रही बदरा के बीच-बीच,
गोरी अकुलाय रही नैनन को मीच-मीच।
घनश्याम मैथिल अमृत ने वास्तविकता के करीब चुनिंदा क्षणिकाएँ पढ़ी ।
जब से बच्चे ठीक ठाक कमाने लगे ,
मां बाप के पास कम आने लगे , |
मुजफ्फर इक़बाल सिद्दीकी ने अपने अनूठे अंदाज़ में बहुत बढ़िया ग़ज़ल की प्रस्तुति दी -
वो चाहता है कि
एक रोज़ मिल ही जाऊँ उसे
मैं जानता हूँ कि
एक रोज़ का मिलना भी कोई मिलना है
कांता रॉय की कविता “उल्टी गिनती” लीक से हट कर रही
जिस तरह यह पंखा
छत पर उल्टा टंगा
तुम्हारे हिसाब से घूमता है,
हम भी किसी और की गणना पर
उल्टी दिशा में
पल-पल घटते हुए
बीतते जा रहे हैं।
सुनीता प्रकाश बहुत सुरीले कंठ से मधुर स्वर में वर्षा गीत सुनाया -
उमड़ घुमड़ छाये ये बदरा
नेह नीर बरसाये जियरवा
संस्था की राष्ट्रीयअध्यक्ष संतोष श्रीवास्तव ने बहुत ही आकर्षक अंदाज़ में , स्वरचित ग़ज़ल पढ़ कर वाहवाही लूटी ।
मेरे दिल में उसका ख्याल था मेरे ख्वाब में वो जमाल था
वह थी चंद लम्हों की दास्तान वही जिंदगी भी ठहर गई
अंत में शेफालिका श्रीवास्तव ने अतीत की स्मृतियों में अधिक न रहने का संदेश देते हुए कविता “मन की चाह “ सुनाई ।
मन चाहता है , लौटना
पुरानी जगह ,यादों और
स्मृतियों में .....
जबकी लौटना .....
इतना आसान
नहीं होता है ....
ग्रामीण चौपाल की तर्ज़ पर आधारित काव्य चौपाल एक सफल अनऔपचारिक कार्यक्रम है, जिसमें कुछ लोग मिल कर बैठते हैं, आपस में कविताएँ सुनते हैं व सुनाते हैं । साथ ही कुछ साहित्यिक चर्चा का आनंद लेते हैं । इस तरह सितंबर माह की काव्य चौपाल मधुर वातावरण में संपन्न हुई ।
प्रस्तुति
शेफालिका श्रीवास्तव
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