काव्य :
दुनिया भर में बोली जाती,सबमें प्यार बढ़ाती हिन्दी है
प्यारी भारत माता के,भव्य भाल की बिन्दी है,
भारत में सबकी भाषा,बोल चाल की हिन्दी है।
सुर,लय,ताल,शब्द,व्याकरण और उच्चारण से,
रत्नाकर सी है विशाल है,नहीं ताल सी हिन्दी है।।1।।
देवलोक से सीधे उतरी,अपनी देववाणी हिन्दी है ,
सूर,कबीर और रसखान की,प्रिय वाणी हिन्दी है।
हर घर में हुई विराजित,रामचरितमानस प्यारी है,
राम नाम का अमृत ले आई,उसकी वाणी हिन्दी।।2।।
जैसा लिखते वैसा ही पढते,ऐसी विज्ञानी हिन्दी है,
अ से अनार कर शुरु और,बना देती ज्ञानी हिन्दी है।
सब भाषाओं को सहज समेटती,समावेशी हिन्दी है,
सबको प्रेम से गले लगाती,मीठी वाली बानी हिन्दी है।।3।।
दुनिया भर में बोली जाती,सबमें प्यार बढ़ाती हिन्दी है,
बच्चे,बूढ़े,मर्द या औरत,सबको दुलार दिखाती हिन्दी है।
अपनेपन की अपनी भाषा,गीत ,गजल सुनाती हिन्दी है।
सारे काम राष्ट्रहित के जो,लोगों में सोच बढ़ाती हिन्दी है।।4।।
ये तो नहीं मात्र एक भाषा,ये देवों की दी वाणी हिन्दी है,
ये स्वतंत्रता की आधारशिला,भारत की जवानी हिन्दी है।
एक सूत्र में देश पिरोती,संघे शक्ति की अगवानी हिन्दी है,
राष्ट्र प्रेम से है ओत प्रोत,पर अरि के लिये भवानी हिन्दी है।।5।।
- श्रीपति रस्तोगी,लखनऊ
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