हिंदी भारत माता के माथे की बिंदी सद्भावना मंच का आयोजन
खंडवा। हमारी बोलचाल और लेखन की भाषा जितनी सरल होगी, संवाद उतना ही प्रभावी होगा। हमारी मातृ भाषा हिंदी हमारी जड़ों से जोड़ने वाली डोर है, हिंदी सिर्फ भाषा नहीं, यह हमारी पहचान है, हिंदी भाषा तो भारत माता के माथे की बिंदी है। यह बात सद्भावना मंच संस्थापक प्रमोद जैन तथा व्याख्याता अनूप शर्मा ने हहिंदी दिवस पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान कही। मंच सदस्य कमल नागपाल ने बताया कि मंच कार्यालय पर संपन्न विशिष्ट आयोजन में राधेश्याम शाक्य, त्रिलोक चौधरी, बी डी सराफ ने हिंदी पर कविता पाठ किया। इस अवसर पर संस्थापक प्रमोद जैन, ओम पिल्ले, अनूप शर्मा, गणेश भावसार, त्रिलोक चौधरी, राधेश्याम शाक्य, कमल नागपाल, एनके दवे, सुरेन्द्र गीते, डॉ ज.च. चौरे,डॉ एमएम कुरैशी, निर्मल मंगवानी, राजेश पौरपंथ, अजय मंडलोई, बी डी सराफ, अशोक शर्मा, अशोक पारवानी, सुभाष मीणा और कैलाश पटेल आदि उपस्थित रहे।
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