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काव्य : प्रेम का यही स्वरूप - डॉ ब्रजभूषण मिश्र , भोपाल


 काव्य : 

प्रेम का यही स्वरूप


मत देखो सौंदर्य मेरा

ना ही मेरे नयन

रूप ,रंग,भी ना देखो

बस देखो मेरा मन


यौवन तन का क्यों देखते

देखो मेरा व्यवहार

आकर्षण मुझमे दिखे

तब ही करना ,मुझे प्यार


है रूप मेरा,अल्पावधि का

है त्वचा,कुछ दिन  ही कंचन

असुघटित,शरीर में मैं बसती

क्या मैं ,तुमको स्वीकार


सुन्दर होता प्रेम सतत

वो कभी ना देखे रूप

तन की झुर्री में भी गहराता

ब्रज,प्रेम का यही स्वरूप


- डॉ ब्रजभूषण मिश्र , भोपाल


देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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