सूर्य का उत्तरायण गमन
हमारे जीवन में सूर्य का विशेष महत्व है,विदित हो कि सूर्य असीम ऊर्जा का स्रोत है,जो हमें प्रकाश व ऊष्मा प्रदान करता है।
पृथ्वी पर दिन और रात ,सूर्य के कारण ही संभव हैं,पृथ्वी सूर्य के चारो ओर परिक्रमा करती है,इस परिक्रमा के क्रम में छह माह ,पृथ्वी का उत्तरी ध्रुव सूर्य की ओर होता है और शेष छह माह दक्षिणी ध्रुव।जब पृथ्वी का उत्तरी ध्रुव सूर्य की ओर होना आरंभ होता है या यूं कहा जाए की सूर्य का गमन या संक्रमण पृथ्वी पर उत्तर की ओर होता है तो यह भौगोलिक स्थिति उत्तरायण कही जाती है।
भारतीय संस्कृति में उत्तरायण अति महत्वपूर्ण स्थिति मानी गई है जो सहज समझ में आती है,सर्दी या ठंड का प्रकोप कम होना आरंभ हो जाता है,दिन बड़े होने लगते हैंऔर रातें छोटी।
मौसम भी अनुकूल होने लगता है,ऋतु बदलती है,बसंत का आगमन होने लगता है,हमारे देश में यह उत्तरायण,मकर संक्रांति के पर्व के रूप में मनाया जाता है।यह 15 जनवरी को पड़ता है,विभिन्न प्रदेशों में इस पर्व को विभिन्न नामों से मनाया जाता है,गुजरात में उत्तरायण,पंजाब हरियाणा ,दिल्ली में लोहड़ी,उत्तरप्रदेश में खिचड़ी पर्व के रूप में और दक्षिणी राज्यों में पोंगल के नाम से।
इस दिन के लिए विभिन्न पौराणिक कथाएं है,आज के ही दिन भागीरथ जी निज प्रयासों से गंगा जी को धरती पर लेकर आए थे,भीष्म पितामह ने आज के दिन को ही अपने शरीर को त्यागने के लिए चुना आदि।
उत्तरायण से शुभ दिनों की शुरुआत मानी गई है,अब खरमास समाप्त हो जाने के कारण शुभ पूजन कार्य,,विवाह, मुंडन ,यज्ञोपवीत आदि आरंभ करने के उचित,शुभ दिन आ गए होते है।उत्तरायण अब 15 जनवरी को पड़ रहा है,करीब 1000 वर्ष तक यह 14 जनवरी को पड़ता रहा है।
नई फसल का यह त्योहार पवित्र नदियों में स्नान,दान और तिल, गुड़ चूड़ा,दही, खिचड़ी,लड्डुओं और विशिष्ट पकवानो की पहचान लिए,हम हिन्दू भारतवासियों के तन मन में अपनी खुशबू बिखेरता आया है,तभी तो मन खुशियों के लाल,पीले,नीले ,हरे रंग लिए पतंगों को ऊंचे आकाश में उड़ाता आया है इस त्योहार में।
अब ,क्रमशः गर्म होते दिन,ऊर्जा ,उमंग देते रहेंगे,बसंत लहराएगा,रंगीन पुष्प खिलेंगे,खुशबू से जीवन में खुशियां और उल्लास भर देंगे सूर्य का उत्तरायण गमन जो हो गया है ।
- डॉ ब्रजभूषण मिश्र ,भोपाल
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