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पापों को करने से ही पाप नहीं होता बल्कि क्रियाओं को करने से भी पाप का आश्रव होता है - मुनि सुव्रतसागर महाराज


 

पापों को करने से ही पाप नहीं होता बल्कि क्रियाओं को करने से भी पाप का आश्रव होता है - मुनि सुव्रतसागर महाराज

आदिकुमार के राज्याभिषेक में उमड़े श्रद्धालु, असि मसि क़ृषि सहित षटकर्म का दिया उपदेश

श्रीमज्जिजिनेन्द्र पंचकल्याणक महा महोत्सव के चौथे दिन 400 तीर्थंकर भगवंतों को हुआ वैराग्य, हुए दीक्षा कल्याणक संस्कार।

शुक्रवार को होगी 400 से अधिक मुनिराजो की होगी आहारचर्या, केवल्य ज्ञान के संस्कार।

तालबेहट (ललितपुर) बुंदेलखंड के प्रसिद्ध दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र पावागिरि में परम पूज्य आचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज एवं नवाचार समयसागर महाराज के मंगलमय आशीर्वाद से आयोजित श्रीमज्जिजिनेन्द्र जिनबिम्ब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा विश्व शांति महायज्ञ एवं नव गजरथ महा महोत्सव के तीसरे दिन वात्सल्य मूर्ति मुनि सुव्रतसागर महाराज के पावन सान्निध्य एवं प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी संजय भैया मुरैना, सह प्रतिष्ठाचार्य अमित जैन शास्त्री इंदौर के दिशा निर्देशन में गुरुवार को सुबह मूलनायक भगवान चमत्कारी बाबा पारसनाथ स्वामी का मस्तिकाभिषेक किया गया। अयोध्या नगरी में अभिषेक शांतिधारा, जन्म कल्याणक की पूजन-विधान के बाद बुंदेली संत मुनि सुव्रतसागर महाराज का 54 वाँ अवतरण दिवस मनाया। मंगलाचरण ब्रह्मचारिणी निधि दीदी बीना ने किया। मुनि श्री का पाद पृच्छालन महिला मण्डल बीना एवं अंशु राजमल जैन नरवर परिवार एवं शास्त्र भेंट स्वाति सचिन जैन भेल ने किया। बुंदेली संत मुनि सुव्रतसागर महाराज ने धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए कहा पापों को करने से ही पाप नहीं होता बल्कि क्रियाओं को करने से भी पाप का आश्रव होता है। अतः बहुत जरुरी है कि हमें समझना होगा कि कैसे चलें कैसे सोएं कैसे खाएं कैसे बोलें कैसे पापों का बंध न हो। कभी अभिमान मत करना क्योंकि लौकिक जीवन में हमें सभी की आवश्यकता होती है। माता-पिता के बिना हमारा कभी जीवन नहीं हो सकता, पिता निमित्त बनते हैं और माता नौ माह की पीड़ा सह हमें जन्म देती है, इसलिए विश्व में यदि कोई सबसे बड़ा है तो माँ है। मानतुंगाचार्य महाराज ने भक्तामर पाठ में भी माँ की महिमा का गुणगान किया है, माँ के उपकारों को कभी मत भूलना। मुनि श्री ने कहा माँ का आशीर्वाद लेकर किसी भी कार्य को शुरू कर देना सफलता निश्चित मिल जाएगी। माँ के बिना संसार शून्य हो जाएगा। माँ कभी अपने बच्चों को भूखा नहीं सोने देती, माँ की ममता और पिता का योगदान भी अकल्पनीय है। माता-पिता की सेवा करो भक्ति करो और अपने जीवन को सफल बनाओ।साधु के प्रति कभी छल-कपट राग - द्वेष का भाव मत रखना। दोपहर की बेला में तप कल्याणक के संस्कार किये गये। जिसमें महाराजा नाभिराय का दरबार, आदि कुमार का राज्याभिषेक, राज तिलक, राजव्यवस्था, 32 मुकुट बद्ध राजाओं द्वारा भेंट समर्पण, ब्राह्मी सुंदरी को अक्षर और अंक का ज्ञान, असि मसि क़ृषि आदि षटकर्म उपदेश, नीलांजना नृत्य से वैराग्य उत्पत्ति, लौकान्तिक देवों का आगमन एवं स्तवन दीक्षा, बारह भावना का प्रस्तुतीकरण एवं दीक्षा संस्कार विशेष दर्शनीय रहे। जिसमें भारी श्रद्धालु उमड़े। इस मौके पर मुनि श्री ने धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि मोक्ष का द्वार केवल दिगम्बरत्व से खुलेगा गुरु के चरण से खुलेगा। जो गृहस्थ जीवन में जाते हैं डरना नहीं क्योंकि 19 तीर्थंकर भगवान ने गृहस्थ जीवन में प्रवेश कर वैराग्य को प्राप्त किया। सायं काल महाआरती श्रावकश्रेष्ठी देवेंद्र कुमार प्रवीण जैन बंडा परिवार ने की। रात्रि में भरत-बाहुबली नाटिका का गोलालारीय दिगम्बर जैन समाज ललितपुर के द्वारा चाय-नाश्ता की समुचित व्यवस्था की गयी। कार्यक्रम में बा. ब्र. अंशु भैया कोलारस, संजय भैया इंदौर,पारस भैया, पं. विनोद कुमार शास्त्री, राजकुमार चकरपुर, अध्यक्ष ज्ञानचंद जैन बबीना, मंत्री जयकुमार जैन कन्धारी, कोषाध्यक्ष उत्तमचंद जैन बबीना, उपाध्यक्ष विशाल जैन पवा, उपमंत्री आकाश चौधरी, ऑडिटर पंकज भंडारी, अजय जैन, रविंद्र कुमार, अमित जैन झाँसी, वीर श्रेयांश जैन ग़दयाना, शांतिकुमार जैन वासौदा, डॉ. राजेंद्र जैन, सुरेंद्र कुमार, विजय जैन, प्रदीप कुमार, जितेंद्र जैन देवास, तिलक जैन, शैलेश जैन, वीरेंद्र कुमार, प्रफुल्ल जैन, सीमा, रागनी जैन, आशीष कुमार, आदेश बबीना, अनिल नयाखेड़ा, अमित जैन, सौरभ कड़ेसरा, अरविन्द कुमार, अचिन जैन  ईलू, गौरव विरधा, सौरभ जैन, शुभम मोदी, अक्षत पवा सहित क्षेत्र प्रबंध कार्यकारिणी समिति, निकटवर्ती एवं देश के कोने - कोने से पधारे सकल दिगम्बर जैन समाज का सक्रिय सहयोग रहा। अध्यक्ष ज्ञानचंद जैन बबीना ने बताया पंचकल्याणक कार्यक्रम के पांचवे दिन 16 जनवरी को सुबह मूलनायक भगवान का अभिषेक शातिधारा के बाद ज्ञान कल्याणक के संस्कार किये जायेंगे जिसमें 400 मुनियों की आहारचर्या एवं सम्भोशरण की रचना विशेष दर्शनीय होगी। आभार व्यक्त मंत्री जयकुमार जैन कन्धारी एवं उपाध्यक्ष विशाल जैन पवा ने संयुक्त रूप से किया।

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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