काव्य :
कुछ बहाने दीजिए ना
पास आने दीजिए ना ।
कुछ सुनाने दीजिए ना।
एक यायावर बना हूं।
कुछ ठिकाने दीजिए ना ।
गर निभा पाना हो मुश्किल ।
तो बहाने दीजिए ना।
सच खड़ा है धूप में फिर।
झूठ छाने दीजिए ना।
थोड़ी सी उलझन तो होगी।
सच बताने दीजिए ना।
है नहीं साहस कहूं कुछ ।
बुदबुदाने दीजिए ना।
आग मुश्किल से जली है।
लप लपाने दीजिए ना।
आप आए हमसे मिलने।
जगमगाने दीजिए ना।
आप की मुझ पर नजर है।
मुस्कुराने दीजिए ना।
- आर एस माथुर , इंदौर
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