काव्य :
मकर संक्रांति पर्व
सूर्य करता जब मकर राशि में प्रवेश,
इस दिवस मिलता शुभाशीष अशेष।
विश्व प्रसिद्ध सूर्य पर्व कहलाता है ,
मकर संक्रांति पर्व जब आता है ।
अनूठा है यह मकर संक्रांति त्योहार,
होता खिचड़ी ,तिल ,लड्डू का आहार।
मकर संक्रांति है फसलों का त्यौहार ,
बनाते मीठी पकवान और सुंदर उपहार
होता इस दिन नदियों में, संगम में स्नान ,
करते अन्न ,तिल ,गुडऔर पकवान का दान ।
माघ महीने में करते जो प्रयाग में तीन बार स्नान ,
मिलता उन्हें शुभ फल अश्वमेध यज्ञ करने के समान।
पद्म पुराण में शिव जी का नारद से है कहना ,
माघ मास में स्नान करने मात्र से ,पुण्यकाल की अगणित है गणना।
भिन्न भिन्न राज्य संक्रांति के भिन्न भिन्न नाम ,
भिन्न भिन्न पकवान,पर मान्यता एक समान ।
कहीं खाते खिचड़ी ,कहीं उड़ाते पतंग,
कहीं खाते मक्के की रोटी और उठाते रेवड़ी का आनंद।
कहीं होती गाय बैलों की पूजा,
कहीं पुरानी चीजें जलाने का चलन ,
कहीं बनते तिल गुड के लड्डू,
तिल ,गुड देता है मीठा जीवन।
इस पर्व से मिलता दान ,परोपकार सामंजस्य का संदेश,
जीवन में एकमात्रसकारात्मकता ,मेहनत सद्भाव हो उद्देश्य।
- श्रीमती प्रतिभा दिनेश कर
विकासखण्ड सरायपाली
जिला महासमुन्द
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