काव्य :
ग़ज़ल
पश्चिमी हवा के इशारे देखे,
प्यार में पागल ये प्यारे देखे,
दिल लगाने की सजा देखो,
प्यार में हम ने ख़सारे देखे,
बेहया पालक जब सोते रहे,
राह भटके बच्चे बिचारे देखे,
अब सोने सी मंहगी हुई बेटी,
आज कितने बेटे कुंवारे देखे,
पूरे सबाब पर चाँद जब हो,
चाँद को घेरे हुए सितारे देखे,
नादाँ सबाब पर फिसले हुए,
घरों के झुलसे हुए नज़ारे देखे,
इनके अरमां के खातिर जागो,
"विनय "बुजुर्गो के सहारे देखे,
- विनय चौरे , इटारसी
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