सरोकार :
एनजीटी के निर्देश के पालन से ही मिलेगा सबको स्वच्छ जल
- डॉ. चन्दर सोनाने , उज्जैन
इन्दौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हो रही मौतों के बीच हाल ही में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ( एनजीटी ) ने भी मध्यप्रदेश में पेयजल व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए सबको स्वच्छ जल मिले इसके लिए विस्तृत निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों का पालन करने से सबको स्वच्छ जल मिल सकने की संभावना है। प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से अपेक्षा है कि वे ट्रिब्यूनल के निर्देश का पूरा पालन कराएंगे, ताकि सबको स्वच्छ जल मिल सके।
मुख्यमंत्री से यह अपेक्षा इसलिए भी कि उन्होंने इन्दौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद पूरे प्रदेश में दो चरणों में जनसुनवाई का प्रदेशव्यापी अभियान शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री ने स्वच्छ जल अभियान की घोषणा करते हुए प्रथम चरण 10 जनवरी से 28 जनवरी तक चलाने के निर्देश दिए है। इसी तरह दूसरा चरण 1 मार्च से 31 मई तक चलाया जायेगा। इस अभियान के अन्तर्गत हर शहर में हर मंगलवार को जनसुनवाई होगी। इसमें कोई भी व्यक्ति पीने के पानी से जुड़ी समस्या बता सकेगा। अभियान के अंतर्गत समस्त जल शोधन यंत्रों एवं पेयजल संग्रहण टंकियों की नियमित सफाई की जाएगी। जीआईएस मैप आधारित एप के माध्यम से निगरानी भी की जाएगी।
उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश के इन्दौर के भागीरथपुरा में दूषित जल पीने से 24 लोगों की अकाल मौत हो गई। हालांकि सरकार 15 मौतें ही मान रही है। राज्य सरकार प्रत्येक मृतक के परिवार को 4 लाख रूपए की आर्थिक सहायता भी दे रही है। इस आर्थिक सहायता को बढ़ाने की माँग भी की जा रही है।
एनजीटी ( राष्ट्रीय हरित अधिकरण ) की सेन्ट्रल जोन बेंच ने राज्य सरकार और सभी नगर निगमों को फटकार लगाते हुए यह भी कहा कि दूषित पेयजल पर्यावरण, जनस्वास्थ्य और संविधान के अनुच्छेद 21 का सीधा उल्लंघन भी है। एनजीटी ने इन्दौर के साथ ही पूरे प्रदेश में दूषित पानी से फैली बीमारियों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए यह भी कहा है कि यह समस्या अकेले इन्दौर की नहीं है। भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर, खरगोन जैसे शहरों में भी यही हाल है।
एनजीटी ने अपने निर्देश में यह भी कहा है कि अब मध्यप्रदेश के हर शहर में पानी की गुणवत्ता की जानकारी सार्वजनिक करनी होगी। शिकायत के लिए 24×7 वाटर ऐप बनाना होगा। पाईपलाईन से लेकर टंकियों तक जिम्मेदारी तय करनी होगी। एनजीटी ने अपने निर्देश में यह भी कहा है कि प्रदेश के सभी तालाबों, कुएं, बावड़ी के पास से अतिक्रमण हटाएं जाए। हर घर पानी का मीटर लगाएं। पानी का नियमित क्लोरीनेशन की जाए। तालाबों में मूर्ति विसर्जन पर भी रोक लगाई जाए। एनजीटी ने भोपाल के तालाबों पर भी संज्ञान लेते हुए कहा है कि भोपाल के छोटा तालाब, शाहपुरा आदि में फीकल कोलीफार्म मिला है। यहीं से भोपाल के 5 लाख लोगों को पीने का पानी प्रदाय किया जा रहा है।
एनजीटी ने केन्द्र सरकार के आंकड़ों से ही दूषित पेयजल की गंभीरता बताते हुए कहा कि देश में हर साल दूषित पानी पीने से 2 लाख लोग मर जाते हैं। सन 2005 से 2022 तक पानी से होने वाली बीमारियों में 86 प्रतिशत केस डायरिया के मिले हैं। एनजीटी ने केन्द्र के आंकड़ों को अत्यन्त गंभीर बताते हुए इससे बचने के उपाय पर गंभीरतापूर्वक कार्य करने की जरूरत भी बताई।
एनजीटी ने मध्यप्रदेश के शहरों में स्वच्छ जल आमजन को मिले, इसके लिए विस्तृत निर्देश दिए है। किन्तु ये निर्देश केवल कागजों पर नहीं रहे, उन्हें अमलीजामा भी पहनाया जाए यह जरूरी है। मुख्यमंत्री से यह अपेक्षा है कि वे प्रदेश में आमजन को स्वच्छ जल मिले, इसके लिए एनजीटी के निर्देशों को अमलीजामा पहनायेंगे, ताकि आमजन को स्वच्छ जल मिल सके।
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