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एआई से मजबूत होगी भारत की कूटनीति - सत्य प्रकाश , दिल्ली


 

एआई से मजबूत होगी भारत की कूटनीति

- सत्य प्रकाश

भारत ने वैश्विक प्रभाव बढाते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक को सब देशों के लिए सुलभ बनाने के प्रयास शुरु कर दिये हैं। कई देशों,विशेष रूप से ग्लोबल साउथ (विकासशील और कम आय वाले देशों) के लिए एआई का प्रयोग तकनीक को डेमोक्रेटाइज करना, डेटा प्रबंधन, सक्षम कंप्यूटर और डिजिटल बुनियादी ढांचे जैसे बुनियादी संसाधनों तक निष्पक्ष और सस्ती पहुंच पर निर्भर करता है। इस चुनौती से निपटने के लिए एक समन्वित वैश्विक सहयोग की आवश्यकता है। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 इस दिशा में बडा कदम है। इसमें तकरीबन 20 राष्ट्राध्यक्ष, 50 से अधिक देशों के मंत्री और 100 से अधिक वैश्विक एवं भारतीय कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एक साथ आ रहे हैं। डेमोक्रेटाइज़िंग एआई रिसोर्सेज वर्किंग ग्रुप एक विशेष पहल है। भारत, मिस्र और केन्या की सह-अध्यक्षता वाला यह समूह, साझा पहुंच, सहयोग और क्षमता निर्माण से एक अधिक समावेशी और संतुलित वैश्विक एआई परिवेश पर जोर देता है। 

यह कार्य समूह यह सुनिश्चित करने का प्रयास करता है कि एआई के आवश्यक संसाधन सबके लिए सुलभ और सस्ते हों, ताकि सभी देश अपनी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुसार एआई के विकास, उपयोग और इसे लागू कर सके। यह समूह एआई संसाधनों को ग्लोबल पब्लिक गुड्स के रूप में सुलभ और सस्ता बनाने और डिस्ट्रिब्यूटेड एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण और ओपन इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की सुविधा प्रदान करने पर बल देता है। इसके अलावा लोकल एआई परिवेश को मजबूत करने के लिए क्षमता निर्माण और ज्ञान के आदान-प्रदान का सहयोग करना इसकी प्राथमिकता में है। 

भारत का एआई को सबके लिए सुलभ बनाने का दृष्टिकोण यह दिखाता है कि स्केल, इनक्लूजन और इनोवेशन एक साथ आगे बढ़ सकते हैं। अफोर्डेबिलिटी, ओपननेस और ट्रस्ट पर ध्यान केंद्रित करने से यह सुनिश्चित होता है कि एआई का लाभ किसानों, छात्रों, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स और सार्वजनिक संस्थानों तक समान रूप से पहुँचे। भारत ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं के अनुरूप एक मॉडल पेश करता है। 

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भारत की विकास यात्रा का एक केंद्रीय स्तंभ बन गया है। यह गवर्नेंस को सुदृढ़ कर रहा है, सार्वजनिक सेवाओं के वितरण में सुधार ला रहा है और ऐसे समाधानों को सक्षम बना रहा है जो व्यापक स्तर पर नागरिकों तक पहुँच सकें। मानव प्रगति को हमेशा तकनीक ने आकार दिया है। बिजली ने दैनिक जीवन और कार्यशैली को बदला, कंप्यूटर ने सूचनाओं के प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) के तरीके को बदल दिया, इंटरनेट ने सीमाओं के पार लोगों और प्रणालियों को जोड़ा और मोबाइल फोन ने तकनीक को सीधे नागरिकों के हाथों में पहुँचा दिया। एआई इन्हीं आधारों पर निर्मित हुआ है और अब कृषि, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, मैन्युफैक्चरिंग, जलवायु संरक्षण और गवर्नेंस जैसे क्षेत्रों को बदलने के लिए साथ मिलकर काम कर रहा है। भारत के लिए, एआई सबकी पहुँच में हो,  यह सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य है कि इसके लाभ व्यापक रूप से साझा किए जाएँ और वर्ष 2047 तक विकसित भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप हों।

एआई को आम जन के लिए सुलभ कराना मुख्य रूप से कंप्यूटिंग शक्ति, डेटा रिपॉजिटरी और मॉडल इकोसिस्टम तक समान पहुँच पर निर्भर करता है। आज के समय में ये संसाधन ही यह तय करते हैं कि डिजिटल अर्थव्यवस्था में कौन नवाचार कर सकता है, कौन प्रतिस्पर्धा में टिक सकता है और कौन प्रभावी ढंग से गवर्नेंस कर सकता है। भारत का विकास-केंद्रित दृष्टिकोण एआई रणनीति के मूल में इस सुलभता को रखता है। 

ग्लोबल साउथ में आयोजित होने वाला यह पहला वैश्विक एआई शिखर सम्मेलन है। एआई के डेमोक्रेटाइजेशन का अर्थ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को उपयोगकर्ताओं के एक विस्तृत और विविध वर्गों के लिए सुलभ, किफायती और उपयोगी बनाना है। डेमोक्रेटाइजेशन का तात्पर्य आर्थिक अवसरों को बढ़ाना भी है। यह गति भारत के कार्यबल में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, जहाँ तकनीकी और एआई इकोसिस्टम में 60 लाख से अधिक लोग कार्यरत हैं। अक्टूबर 2025 में जारी नीति आयोग की रिपोर्ट एआई फॉर इनक्लूसिव सोसाइटल डेवलपमेंट में कहा गया है कि एआई सर्विसेज, मार्केट और वित्तीय प्रणालियों तक पहुँच बढ़ाकर भारत के 49 करोड़ अनौपचारिक श्रमिकों को सशक्त बना सकता है। 

प्रमुख क्षेत्रों में एआई एप्लीकेशन पहले से ही बदलाव ला रहे हैं। कृषि के क्षेत्र में, एआई मौसम का पूर्वानुमान लगाकर, कीटों के खतरों की पहचान कर और सिंचाई एवं बुआई के निर्णयों में मार्गदर्शन देकर किसानों की मदद कर रहा है। किसान ई-मित्र जैसे प्लेटफॉर्म सरकारी योजनाओं तक पहुँच को सरल बनाते हैं, जबकि नेशनल पेस्ट सर्विलांस सिस्टम और क्रॉप हेल्थ मॉनिटरिंग उपग्रह और मौसम डेटा का उपयोग करके फसलों की रक्षा करते हैं और इनकम सिक्योरिटी में सुधार करते हैं। स्वास्थ्य सेवा में, एआई बीमारियों का जल्द पता लगाने में सक्षम बनाता है, मेडिकल इमेजरी (जैसे एक्स-रे, एमआरआई) के विश्लेषण में सहायता करता है और टेलीमेडिसिन सेवाओं को मजबूत करता है, जिससे ग्रामीण मरीजों को विशेषज्ञों से जोड़ा जा रहा है और इलाज की गुणवत्ता और पहुँच बेहतर हो रही है।

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सत्य प्रकाश

नयी दिल्ली

SATYA PRAKASH

NEW DELHI

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देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

3 Comments

  1. सत्य प्रकाश जी, आधुनिक जगत से परिचय का अच्छा प्रस्तुतीकरण, हार्दिक बधाई🎉🎊

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    1. आपका बहुत बहुत आभार।

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  2. लतिका जाधव जी

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