प्रभात साहित्य परिषद,भोपाल की बाबूजी विषय पर काव्य गोष्ठी संपन्न
भोपाल। राजधानी की चर्चित संस्था प्रभात साहित्य परिषद द्वारा " बाबूजी" विषय पर काव्य गोष्ठी का आयोजन हिन्दी भवन के नरेश मेहता कक्ष में वरिष्ठ साहित्यकार महेश प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में तथा वरिष्ठ गीतकार राजेन्द्र शर्मा "अक्षर " के मुख्य आतिथ्य में एवं वरिष्ठ साहित्यकार चरणजीत सिंह कुकरेजा के विशेष आतिथ्य में तथा डॉ. अनीता तिवारी के संचालन में किया गया.
गोष्ठी के आरम्भ में सुनीता शर्मा सिद्धि ने सरस्वती वन्दना का पाठ किया.तदुपरांत प्रेमचंद गुप्ता ने पढ़ा हम क्या जाने गर्मी सर्दी बाबूजी. हम कब चलते अपनी मर्जी बाबूजी. वहीं रमेश नन्द ने पढ़ा घर घर की है हाँडी फूटी बाबूजी सोते बाड़े में. कालिज पास हो गया बेटा अम्माँ ठिठुर रही जाड़े में. वहीं महेश प्रसाद सिंह ने पढ़ा बेटा पीड़ित मलेरिया से बाबूजी को टी वी.धनिया मुनिया पीलिया पीड़ित खांसी सताये बी बी. वहीं प्रदीप कश्यप ने पढ़ा पहली को जब तनख्वाह पाते बाबूजी. खुशियाँ पूरी घर की लाते बाबूजी. वहीं रणजीव झा ने पढ़ा सूनी पडी अब वो पावन गली बाबूजी. वो घर शहर और सब प्रहर बाबूजी. वहीं कमल सिंह कमल ने पढ़ा बच्चों की सुख दुख की साथी सीख तुम्हारी बाबूजी. पग पग पर है राह दिखाती सीख तुम्हारी बाबूजी. वहीं चरणजीत कुकरेजा ने पढ़ा घर तेरे बिन घर न लगता बेटा जल्दी आया कर. चार निवाले एक प्रहर तो साथ बैठकर खाया कर वहीं राजेंद्र शर्मा अक्षर ने पढ़ा आँगन वाला पेड़ आजकल मुरझाया सा रहता है. बना लिया है उसकी जड़ में दीमक ने घर बाबूजी. वहीं दिनेश भदौरिया शेष ने पढ़ा छू न सका मुझको कभी जीवन का सन्ताप बाबूजी जब तक रहे मेरे रक्षक आप. इनके इलावा अंशुमान खरे विरोनिका पीटर शोभा जोशी डॉ सीमा अग्रवाल कृष्ण देव चतुर्वेदी डॉ प्रतिभा दुवेदी आबिद काजमी उमेश तिवारी आरोही मोहम्मद ताहा अल हुसैन आदि ने भाग लिया.
अन्त में रमेश नन्द ने सभी का आभार व्यक्त किया.
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