काव्य :
रक्षा
मत घबराना साथी
जब तक साँस चले,
अपना साथ बना रहे
चाहे कोई न साथ चले।
सत्य राह पर डटकर रहना
संकल्प लिए चलते रहना ,
दिल में प्यार बसाए साथी
सदा प्यार ही बाँटते चलना।
जिस धरती ने जन्म दिया
उसे न कभी गंदा करना,
तन मन को खुश रखने वाले
आकाश को तुम साफ रखना।
जल और वायु को शुद्ध रख
उनकी पूजा कराना व करना।
स्वच्छ रहना स्वच्छ रखना
अपने जीवन की रक्षा करना
सच्ची राह चलते रहना
खुश रहना खुशी बाँटना,
सबको बनाकर अपना
सबके जीवन की रक्षा करना।
- डॉ. सत्येंद्र सिंह
पुणे, महाराष्ट्र
Tags:
काव्य
.jpg)

प्रेरक एवं सुंदर रचना
ReplyDeleteडॉ. सत्येंद्र सिंह जी, संदेशप्रद काव्य के लिए हार्दिक बधाई!👌💐
ReplyDelete