काव्य :
नारी की महिमा
दुनिया की पहचान है नारी, जग का अभिमान है नारी,
ममता, शक्ति, त्याग, तपस्या धरती का वरदान है नारी।।
हर आँगन की शान है नारी, हर घर की मुस्कान है नारी।
रिश्तों की मधुर डोर बनाकर, जीवन की पहचान है नारी।
दुख की घड़ी में ढाल बनती, सुख में मधुरिम तान है नारी।
ममता के सागर से गहरी, जग की अमिट उड़ान है नारी।।
दुनिया की पहचान................
मर्यादा की दीपशिखा है, पुरुषों का सम्मान है नारी।
संस्कृति की सुगंध सहेजे, भारत की पहचान है नारी।
कभी दुर्गा, कभी सरस्वती, तो कभी लक्ष्मी समान है नारी।
पूजा के योग्य सदा से, मानव का सम्मान है नारी।।
दुनिया की पहचान...............
अब नभ की ऊँचाई छूती, साहस की उड़ान है नारी।
शिक्षा, विज्ञान, कला, प्रशासन, हर क्षेत्र महान है नारी।
जेट उड़ाती, अंतरिक्ष में कदम बढ़ाती अभियान है नारी।
नए युग का स्वर्णिम अध्याय, भारत की पहचान है नारी।3।
दुनिया की पहचान.............
माँ बनकर ममता लुटाती, बहन बनकर स्नेह जगाती है नारी।
जीवन की अंधेरे राहों में, आशा का दीप जलाती है नारी।
मधुर शब्दों में क्या लिख दूँ, महिमा है जिसकी अपार।
“अ” से आरम्भ सृष्टि की, अर्धांगिनी भी कहलाती है नारी।।
दुनिया की पहचान...............
- सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"
ग्राम-बाराडोली(बालसमुंद),पो.-पाटसेन्द्री
तह.-सरायपाली,जिला-महासमुंद(छ. ग.) पिन- 493558
मोब.- 8103535652
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