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स्मरण मुक्ति बोध में हुआ व्याख्यान एवं काव्य पाठ का गरिमामय आयोजन


 

सत् चित्त आनंद तीनों शब्दों को लेखनी की गरिमा में समाहित करते हैं - आचार्य हरिशंकर 

मुक्तिबोध मूल रूप से सिर्फ मानवतावादी थे - डॉ (सुश्री) शरद सिंह

स्मरण मुक्ति बोध में हुआ व्याख्यान एवं काव्य पाठ का गरिमामय आयोजन

सागर । प्रगतिशील कविता और नई कविता के बीच सेतु के रूप में पहचाने जाने वाले हिन्दी साहित्य के प्रमुख आलोचक,कहानीकार व कवि,गजानन माधव मुक्तिबोध पर केंद्रित "स्मरण मुक्तिबोध" कार्यक्रम का गरिमामय आयोजन मुक्तिबोध सृजन पीठ साहित्य अकादमी भोपाल द्वारा रविवार को शासकीय कन्या महाविद्यालय के सभागार में सम्पन्न हुआ. इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सुप्रसिद्ध विद्वान महामहोपाध्याय आचार्य हरिशंकर दुबे जबलपुर ने मुक्तिबोध की रचनाधर्मिता के साथ उनके जीवन के उतार-चढ़ाव पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि सत् चित्त आनंद तीनों शब्दों को लेखनी की गरिमा में समाहित करते हैं.

सारस्वत अतिथि वरिष्ठ लेखिका डॉ (सुश्री) शरद सिंह ने कहा कि "मुक्तिबोध मूल रूप से सिर्फ मानवतावादी थे। यह बात उनकी  "ब्रह्मराक्षस का शिष्य" और "क्लॉड ईथरली" जैसी कहानियां पढ़ने के बाद भली-भांति समझा जा सकता है। मुक्तिबोध की रचनाओं को पुनर्व्याख्यायित किया जाना आवश्यक है।" 

इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक के प्राध्यापक डॉ राकेश सोनी ने भारतीय सांस्कृतिक एवं राष्ट्रवाद के आधार पर मुक्तिबोध की रचनाओं का मूल्यांकन किया। डॉ.सरोज गुप्ता ने मुक्तिबोध के समसामयिक मूल्यों की चर्चा करते हुए उनकी काव्य कृतियां के मर्म को सामने रखा।

कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ आनंद तिवारी ने उन्हें एक राष्ट्रवादी और सामाजिक परिवेश की चिंता करने वाले जागरूक व्यक्तित्व के तौर पर रेखांकित किया.

     मुक्तिबोध सृजन पीठ भोपाल के निदेशक ऋषि कुमार मिश्र ने स्वागत भाषण देते हुए मुक्तिबोध के साहित्य को भारतीय परंपरा का संवाहक बताते हुए उनकी कविता "ब्रह्म राक्षस" में ब्रह्म तत्व का विवेचन किया।

इस अवसर पर नगर के चर्चित साहित्यकार डॉ प्रदीप पाण्डेय के नवीन काव्य संग्रह "वक़्त की ही तू तलाश है" का विमोचन भी मंचासीन अतिथियों एवं वरिष्ठ साहित्यकारों द्वारा किया गया.

कार्यक्रम का द्वितीय चरण काव्य रचना पाठ के लिए समर्पित रहा.अध्यक्षता कर रहे देश के सुप्रसिद्ध कवि ऋषि "श्रंगारी" की कविताओं ने जहाँ श्रोताओं को काव्य रस से सराबोर कर दिया वहीं निरंजना जैन,पुष्पेंद्र दुबे, पी आर मलैया,कपिल चौबे,डॉ नीलिमा पिंपलापूरे, डॉ प्रदीप पांडेय,अमिश साक्षी और युवा कवयित्री माही रिछारिया ने अपनी कविताओं से प्रभावित किया. कवि नलिन जैन निर्मल ने सुचारु संचालन किया.

कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती पूजन और अर्चना प्यासी द्वारा की गई मधुर सरस्वती वंदना से हुई.अयोजक संस्थाओं की ओर से निदेशक ऋषि कुमार मिश्र भोपाल एवं उमा कान्त मिश्र स्थानीय संयोजक सागर ने पुष्प गुच्छ भेंट कर अतिथि स्वागत किया. कवि साहित्यकार आर के तिवारी ने आभार प्रदर्शन किया.

इस अवसर पर बड़ी संख्या में साहित्यजगत के प्रमुख लोगों की उपस्थिति रही जिनमें प्रो. दिनेश अत्रि, टी आर त्रिपाठी, हरिसिंह ठाकुर,अभिनन्दन दीक्षित,मुकेश तिवारी, अम्बिका यादव,डॉ विजयलक्ष्मी दुबे, डॉ छाया चौकसे, सुनीला सराफ,बृन्दावन राय सरल, कपिल बैसाखिया,आशीष द्विवेदी,डॉ. अभय सिंह, अक्षय अनुग्रह,डॉ.विनोद तिवारी, आशीष उपाध्याय, मुकेश निराला,सौरभ दुबे बिहारी सागर,डॉ नरेंद्र प्यासी,यू एस रावत, आनंद मिश्रा आदि के नाम उल्लेखनीय हैं.

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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