प्रभात साहित्य परिषद,भोपाल की काव्य गोष्ठी संपन्न
भोपाल । राजधानी की चर्चित संस्था प्रभात साहित्य परिषद द्वारा *खूबियाँ* विषय पर काव्य गोष्ठी का आयोजन हिन्दी भवन के नरेश मेहता कक्ष में वरिष्ठ साहित्यकार महेश प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में तथा वरिष्ठ साहित्यकार बलराम गुमाश्ता के मुख्य आतिथ्य में एवं वरिष्ठ साहित्यकार कुसुम श्रीवास्तव के विशेष आतिथ्य में तथा कमल सिंह कमल के संचालन में किया गया.
गोष्ठी के के आरम्भ में मंजू मिश्रा ने सरस्वती वंदना का वाचन किया तदुपरांत प्रदीप कश्यप ने पढ़ा बर्फ से ठंडे हो गये रिश्ते, प्यार की उनमें गर्मियाँ भी नहीं. वहीं महेश प्रसाद सिंह ने पढ़ा कौन कहता है आदमी को परखना मुश्किल है, देखते ही चेहरा खूबियाँ तलाश लेता हूँ. वहीं रमेश नन्द ने पढ़ा छाया सहित हजारों फल देता है,बस यही तो उसकी खूबियाँ हैं. वहीं हीरालाल पारस ने पढ़ा खूबियाँ शोर नहीं करती, वे चुपचाप चरित्र गढ़ती हैं. वहीं कमल सिंह कमल ने पढ़ा देखिये ये दौर कैसा चल रहा है. आदमी ही आदमी को छल रहा है. वहीं हरिओम सोनी ने पढ़ा बड़े बड़े स्टेचु सबसे ऊँची मूर्तियाँ हैं. कलाकारों की कूँची में यही खूबियाँ हैं. वहीं आबिद काजमी ने पढ़ा खूबियाँ एक नहीं पर हैं दर्जनों आशिक, कमाल उसकी ये मिसरी घुली जवान का है. वहीं अदिति पारवानी ने पढ़ा मैं क्या चढ़ गई सफलता की दो चार सीढ़ियां. दुनिया की नजरों में खटकने लगीं मेरी खूबियाँ. वहीं कृष्ण देव चतुर्वेदी ने पढ़ा मंद कैसे पड़ गई वो आप वाली खूबियाँ. सो गया मौसम सुहानी प्यार वाली रुबिया. इनके अलावा चन्द्रभान राही आर के झा अंशुमान ऐस ऐन शर्मा मोती सागर संत कुमार मालवीय पूनम गुप्ता प्रेम शीला सिंह डॉ. सीमा अग्रवाल विरोनिका पीटर शोभा जोशी साक्षी के पी गुप्ता उमेश तिवारी आरोही सुरेश पवरा आकाश सरोज लता सोनी ज्योत्सना खोले आदि ने भाग लिया.
अन्त में अशोक निर्मल ने सभी का आभार व्यक्त किया.
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