काव्य :
प्रीत की पिचकारी
होली आई जमकर,
नाचे झूमें सब मिलकर,
कि श्याम रंग चढ़ ही गया।
हो रंग जाए हम, निखर जाए हम,
जीवन में जो श्याम आ गया —
हो देखो होली आई।
बरसाने में गोपियों के
लट्ठों की बोली है,
ग्वालों की ढालों संग
निकलती हँसती टोली है।
रंगों में रंग जाए आज सारा जहाँ —
हो देखो होली आई।
प्रीत की पिचकारी से
जब कान्हा रंगते हैं,
राधा के सपने भी
सतरंगी बन ढलते हैं।
स्नेह की फुहार से रंगीन हो मन-अंगना —
हो देखो होली आई।
होली में गुजिए भी
स्वाद खूब बिखेरेंगे,
केसर-बादाम की ठंडाई
पीकर सब झूमेंगे।
रसिया गीत, ढोल-नगाड़ों संग
झूमें बूढ़े-नौजवान —
हो देखो होली आई।
होली आई जमकर,
नाचे झूमें सब मिलकर,
कि श्याम रंग चढ़ ही गया।
हो रंग जाए हम, निखर जाए हम,
जीवन में जो श्याम आ गया —
हो देखो होली आई।
-श्रीमती अंजना दिलीप दास
बसना छत्तीसगढ़
Tags:
काव्य
.jpg)
