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पृथ्वी को अपना माने और खूब पौधारोपण कर हरित भविष्य का संकल्प लें : पद्मश्री महेश शर्मा


 

पृथ्वी को अपना माने और खूब पौधारोपण कर  हरित भविष्य का संकल्प लें : पद्मश्री महेश शर्मा

पृथ्वी दिवस पर जल गंगा जल संवर्धन अभियान में जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित

मंदसौर से वरिष्ठ पत्रकार डॉ घनश्याम बटवाल की रिपोर्ट 

मंदसौर / विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर “जल गंगा जल संवर्धन अभियान” के अंतर्गत बुधवार को कुशाभाऊ ठाकरे ऑडिटोरियम में जल संरक्षण विषय पर एक विस्तृत कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला सार्थक एनजीओ एवं जनपदों के माध्यम से संपन्न हुई, जिसमें प्रशासनिक अधिकारियों, विशेषज्ञों, जनप्रतिनिधियों, विद्यार्थियों तथा बड़ी संख्या में आम नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से  पद्मश्री श्री महेश शर्मा, भूजल वैज्ञानिक श्री सुनील चतुर्वेदी, जिला कलेक्टर श्रीमती अदिति गर्ग,  सार्थक संस्था  संस्थापक डॉ. उर्मिला तोमर जनपद पंचायत मंदसौर अधिकारी श्री धर्मेंद्र यादव सहित जनपद पंचायत क्षेत्र ग्राम सचिव, सहायक सचिव एवं अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए कलेक्टर श्रीमती अदिती गर्ग ने जल संरक्षण के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि मंदसौर जिले में “जल गंगा जल संवर्धन अभियान” के अंतर्गत लगभग 6000 छोटे-बड़े कार्य संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण का कोई भी प्रयास छोटा नहीं होता, बल्कि छोटे-छोटे कार्य ही लंबे समय में बड़े परिणाम देते हैं। उन्होंने सभी को प्रेरित करते हुए कहा कि जल संरक्षण के कार्यों को सूक्ष्म स्तर पर समझकर उनके व्यवहारिक समाधान निकालना आवश्यक है तथा इनका क्रियान्वयन जमीनी स्तर से होना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मॉडल कार्य किए जाएं जिन्हें अन्य लोग भी अपनाएं और उनका अनुसरण करें। जिले में कंटूर ट्रेंच जैसे कार्यों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि पौधारोपण भी वैज्ञानिक तरीके से, उचित समय, स्थान और प्रजाति के अनुसार किया जाना चाहिए ताकि पौधों की बेहतर वृद्धि सुनिश्चित हो सके।

कार्यक्रम में पद्मश्री और पर्यावरणविद श्री महेश शर्मा झाबुआ, को “जल ऋषि” की उपाधि से सम्मानित किया गया ।

अपने संबोधन में पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हमें अधिक से अधिक पौधे लगाने चाहिए और हरे-भरे पेड़ों की कटाई से बचना चाहिए। उन्होंने प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए कहा कि हमें केवल प्रकृति से लेना ही नहीं बल्कि उसे लौटाना भी चाहिए। 

आपने कहा पृथ्वी को अपना माने यह आश्रय प्रदान करने के साथ प्राणी मात्र का पालन पोषण करती है इससे खिलवाड़ स्वयं के साथ बुरा करने जैसा है । उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल आयोजन और सम्मेलन से जल संरक्षण संभव नहीं है, इसके लिए निरंतर परिश्रम और जमीनी स्तर पर कार्य करना आवश्यक है।

बच्चों को सही मार्गदर्शन और दिशा में अग्रसर करें। 

श्री शर्मा ने झाबुआ आलीराजपुर आदि स्थानों पर 2007 से पर्यावरण सुधार और जल संरक्षण केंद्रित कार्यों और आदिवासी समाज के साथ मिलकर किए परिवर्तन को रेखांकित किया और कहा कि समाज जनों की सामूहिक जिम्मेदारी क्रांतिकारी बदलाव का आधार है । 

प्रख्यात भूजल वैज्ञानिक श्री सुनील चतुर्वेदी ने अपने संबोधन में बताया कि विश्व का लगभग 70 प्रतिशत पानी स्वच्छ नहीं है, जो एक गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर जल संरक्षण किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि पिछले 90 वर्षों में भारत में बड़े पैमाने पर ट्यूबवेल स्थापित हुए हैं, जिसके कारण अब हम भूमिगत जलस्तर पर भी प्रभाव पड़ा है। पहले सतही जल स्रोतों का अधिक उपयोग होता था।

इस अवसर पर “जल गंगा जल संवर्धन अभियान” के अंतर्गत स्कूलों द्वारा आयोजित चित्रकला, रंगोली एवं पर्यावरण एवं जल संरक्षण विषय पर आयोजित प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले स्कूली विद्यार्थियों को अतिथियों ने मंच से सम्मानित किया ।

कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों द्वारा जल संरक्षण से संबंधित विभिन्न प्रश्न पूछे गए, जिनका विशेषज्ञों द्वारा सरल एवं वैज्ञानिक तरीके से समाधान प्रस्तुत किया गया।

सभागृह में रूफ वाटर हार्वेस्टिंग, तालाब जल संरक्षण और संग्रहण, पर्यावरण क्षेत्र में सुधार हेतु आवश्यक जानकारी के साथ प्रोजेक्टर पर फिल्म प्रदर्शित की गई । साथ ही आदिवासी अंचल झाबुआ आलीराजपुर धार आदि क्षेत्रों में पद्मश्री महेश शर्मा के नेतृत्व में जारी अनुष्ठान पर केन्द्रित डॉक्यूमेंट्री " शिव गंगा " का प्रदर्शन किया गया ।

इसके पूर्व शिवानी लोध ने सुमधुर गीत प्रस्तुत किया । स्वागत संबोधन सार्थक संस्था संस्थापक डॉ उर्मिला तोमर ने दिया । संचालन श्रीमती आरती जैन एवं श्रीमती छवि तोमर ने किया। अतिथि सम्मान श्रीमती रचना दोषी, श्री नरेंद्र त्रिवेदी, डॉ सौरभ तोमर, श्री तारे एवं श्री अर्पित सेन श्रीमती चंचला त्रिपाठी भारती पाटीदार अनुरेखा जैन श्री संजय नीमा, श्री मनीष मनी शामगढ़, श्री प्रवीण भंडारी श्री पुरुषोत्तम भट्ट हिमांशु पांडे आदि ने किया ।

इस मौके पर पर्यावरण वाहिनी के पूर्व जिला संयोजक एवं वरिष्ठ पत्रकार डॉ घनश्याम बटवाल ने संपादित साहित्य संग्रह यथार्थ पुस्तक पद्मश्री महेश शर्मा एवं भू जल वैज्ञानिक श्री सुनील चतुर्वेदी को भेंट की।

एक दिवसीय कार्यशाला में विभिन्न संस्थाओं संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ पूर्व प्रिंसिपल डा बी आर नलवाया, दशपुर जागृति संगठन संयोजक सत्येन्द्र सिंह सोम शिक्षाविद् श्री रमेशचंद्र चन्द्रे इंजीनियर बालू सिंह सिसोदिया वरिष्ठ पत्रकार एवं जन परिषद मंदसौर चैप्टर अध्यक्ष डॉ घनश्याम बटवाल, प्रेस क्लब संरक्षक श्री ब्रजेश जोशी। साहित्य परिषद अध्यक्ष श्री नरेंद्र भावसार नंदकिशोर राठौर नरेंद्र सिंह राणावत हस्ती सांखला, राजाराम तंवर अजीजुल्लाखान खालिद राजेंद्र तिवारी डॉ ईश्वर लाल चौहान पत्रकार शम्भुसेन राठौर फोटोजर्नलिस्ट पंकज परमार शैलेंद्र श्रीवास्तव शेर मोहम्मद खान सुनील शर्मा सहित बड़ी संख्या में सहभागी रहे।

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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