सरोकार :
शिक्षा विभाग के प्रयोगों ने बच्चों को कर दिया है शिक्षा से दूर
- डॉ. चन्दर सोनाने , उज्जैन
शिक्षा का अधिकार अधिनियम के नियमों के अन्तर्गत प्राथमिक विद्यालयों को नए भवन से अधिकतम 2 किलोमीटर तक की दूरी तक ही शिफ्ट किया जा सकता है। इसी प्रकार माध्यमिक विद्यालयों को अधिकतम 5 किलोमीटर तक की दूरी तक ही शिफ्ट किया जा सकता है। किन्तु उज्जैन में शिक्षा का अधिकार अधिनियम के नियमों की खुलकर अवहेलना की जा रही है। इस प्रकार शिक्षा विभाग के प्रयोगों द्वारा सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले गरीब परिवारों के बच्चों को शिक्षा से दूर करने का प्रयास किया जा रहा है !
मध्यप्रदेश में पहले सीएम राइज स्कूल और अब सांदीपनि के नाम से खोले जा रहे स्कूल शिक्षा विभाग के प्राथमिकता वाले कार्यो में शामिल है। उज्जैन से करीब 7 किलामीटर दूर ग्राम दाऊदखेड़ी में 54 करोड़ 27 लाख की लागत से एक बड़ी बिल्डिंग बनाई गई है। भवन तैयार होते ही इसी साल से समीप के 11 स्कूलों को इस स्कूल में मर्ज करने का काम आरंभ कर दिया गया है। इन 11 स्कूलों के नाम है - सांदीपनि विद्यालय महाराजवाड़ा क्रमांक 3, प्रावि पालखेड़ी, प्रावि सांवराखेड़ी, मावि चांदमुख, प्रावि सिकंदरी, मावि गोठड़ा, मावि नूतन जयसिंहपुरा, मावि महाकाल मैदान, उमावि माधवगंज, बालक उमावि महाराजवाड़ा क्रमांक 2 और कन्या उमावि सराफा।
ग्राम दाऊदखेड़ी के सांदीपनि स्कूल में 11 प्राथमिक, माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों को शिफ्ट करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इन स्कूलों में कुल 2,978 विद्यार्थी अध्ययनरत है। शिक्षा विभाग के प्रयोगों द्वारा इन करीब 3 हजार बच्चों को शिक्षा से वंचित करने का प्रयास किया जा रहा है ! उल्लेखनीय यह भी है कि इन सभी सरकारी स्कूलों में गरीब परिवारों के छात्र-छात्राएं ही पढ़ रहे हैं।
शासकीय प्राथमिक विद्यालय पालखेड़ी जिसे दाऊदखेड़ी में शिफ्ट किया जा रहा है। उसकी दूरी 3.5 किलोमीटर है। इसी प्रकार दो माध्यमिक विद्यालयों नूतन जयसिंहपुरा और शासकीय विद्यालय महाकाल मैदान की दाऊदखेड़ी से दूरी करीब 7 किलोमीटर है। इतनी दूर बच्चों को शिफ्ट करना उनके अधिकारों का उल्लंघन है।
इसी प्रकार कक्षा 9 वीं से 12 वीं तक की कक्षाओं के हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूल को शिफ्ट करने से पहले शिक्षा विभाग को अपने भोपाल स्थित मुख्यालय से अनुमति लेना जरूरी है ! किन्तु शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने अनुमति लेने के पहले ही 30 मार्च 2026 को उक्त स्कूलों को दाऊदखेड़ी में शिफ्ट करने का आदेश जारी कर दिया है। अब आदेश जारी करने के बाद शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय माधवगंज, शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सराफा और बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय क्रमांक 2 के प्रस्ताव भोपाल भेजे गए है।
शासकीय माध्यमिक विद्यालय नूतन जयसिंहपुरा के 300 विद्यार्थियों को, शासकीय माध्यमिक विद्यालय महाकाल मैदान के 352 विद्यार्थियों को 7 किलोमीटर दूर दाऊदखेड़ी में शिफ्ट करने के आदेश जारी किए गए है। इसी प्रकार उच्चतर माध्यमिक विद्यालय माधवगंज के 370 विद्यार्थी, बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय महाराजवाड़ा क्रमांक 2 के 360 विद्यार्थियों तथा कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सराफा के 580 विद्यार्थियों को भी उनके वर्तमान स्कूल से 7 किलोमीटर दूर शिफ्ट करने का आदेश जारी किया गया है।
शिक्षा विभाग के इन प्रयोगों के कारण 2 स्कूल की समिति शासकीय माध्यमिक विद्यालय महाकाल मैदान और शासकीय माध्यमिक विद्यालय नूतन जयसिंहपुरा कोर्ट पहुंच गई है। यही नहीं 60 से अधिक छात्राओं के पालकों ने अपनी बच्चियों को स्कूल से निकालने के आवेदन भी दे दिए है। किन्तु स्कूल द्वारा उन्हें टीसी नहीं दी जा रही है। आश्चर्य की बात यह भी है कि शिफ्ट किए जा रहे 11 स्कूलों में से 2 गर्ल्स स्कूलों को भी दाऊदखेड़ी शिफ्ट कर दिया गया है, जबकि गर्ल्स स्कूलों को केवल गर्ल्स स्कूल में ही शिफ्ट किया जाना चाहिए !
प्रदेश के मुखिया डॉ. मोहन यादव उज्जैन के ही हैं। उन्हीं के गृहनगरी में गरीब परिवारों के विद्यार्थियों के साथ यह सबकुछ हो रहा है, जो नहीं होना चाहिए। आशा है मुख्यमंत्री इस दिशा में तुरंत पहल कर 7 किलोमीटर दूर शिफ्ट किए जा रहे विद्यार्थियों को न्याय प्रदान करेंगे।
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