काव्य :
शब्द प्यार ही प्यार प्रेम का इजहार हैं
।। गीत।।
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*शब्द प्यार ही प्यार प्रेम का इजहार हैं।*
शब्द ही बना देते हमारे शत्रु हजार हैं।।
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शब्द देते पीर सबको,चीर कर रख देते हैं।
बुद्धि विवेक वाले जरा धीर रख लेते हैं।।
शब्द ही बन जाते हमारे जीने का करार हैं।
*शब्द प्यार ही प्यार प्रेम का इजहार हैं।।*
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शब्द होते दिल का सुकून चैन और आराम हैं।
शब्द बनाते व्यक्ति कोअच्छाऔर बदनाम हैं।।
शब्द बनते कभी मरहम तो कभी हथियार हैं।
*शब्द प्यार ही प्यार प्रेम का इजहार हैं।।*
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जो शब्दों का जाल बुनते स्वयं पकड़ जाते हैं।
अभिमानी बोल कर अहम में अकड़ जाते हैं।।
शब्द कभी दिल में उतरते या बनते तलवार हैं।
*शब्द प्यार ही प्यार प्रेम का इजहार हैं।।*
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शब्दों की मार अंदर तक बड़ी गहरी होती है।
नहीं रखते ख्याल जिनकी संवेदना बहरी होती है।।
मीठे - मीठे शब्द बन जाते फूल और बहार हैं।
*शब्द प्यार ही प्यार प्रेम का इजहार हैं।।*
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कभी शब्द अमृत से तो कभी जहर होते हैं।
कभी शब्द खूबसूरत गजल की बहर होते हैं।।
कभी शब्द दिल निकाल कर रख देते बाहर हैं।
*शब्द प्यार ही प्यार प्रेम का इजहार हैं।।*
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- एस के कपूर"श्री हंस"
बरेली।।
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