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काव्य : शब्द प्यार ही प्यार प्रेम का इजहार हैं - एस के कपूर"श्री हंस" बरेली


 काव्य : 

शब्द प्यार ही प्यार प्रेम का इजहार हैं      

।। गीत।।

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*शब्द प्यार ही प्यार प्रेम का इजहार हैं।*

शब्द ही बना देते हमारे शत्रु हजार हैं।।

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शब्द देते पीर सबको,चीर कर रख देते हैं।

बुद्धि विवेक वाले  जरा धीर रख लेते हैं।।

शब्द ही बन जाते हमारे जीने का करार हैं।

*शब्द प्यार ही प्यार प्रेम का इजहार हैं।।*

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शब्द होते दिल का सुकून चैन और आराम हैं।

शब्द बनाते व्यक्ति कोअच्छाऔर बदनाम हैं।। 

शब्द बनते कभी मरहम तो कभी  हथियार हैं।

*शब्द प्यार ही प्यार प्रेम का इजहार हैं।।*

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जो शब्दों का जाल बुनते स्वयं पकड़ जाते हैं।

अभिमानी बोल कर अहम में अकड़ जाते हैं।।

शब्द कभी दिल में उतरते  या बनते तलवार हैं।

*शब्द प्यार ही प्यार प्रेम का इजहार हैं।।*

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शब्दों की मार अंदर  तक  बड़ी गहरी होती है।

नहीं रखते ख्याल जिनकी संवेदना बहरी होती है।।

मीठे -  मीठे शब्द बन जाते फूल और बहार हैं। 

*शब्द प्यार ही प्यार प्रेम का इजहार हैं।।*

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कभी शब्द अमृत से तो कभी जहर होते हैं।

कभी शब्द खूबसूरत गजल की बहर होते हैं।।

कभी शब्द दिल निकाल कर रख देते बाहर हैं।

*शब्द प्यार ही प्यार प्रेम का इजहार हैं।।*

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- एस के कपूर"श्री हंस"

बरेली।।

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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