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काव्य : कान्हा आना मेरे अंगना - डॉ सत्येंद्र सिंह , पुणे


 

काव्य : 

कान्हा आना मेरे अंगना


कान्हा आना मेरे अंगना,

काम क्रोध मद भागें।

तेरे नाम की ज्योति जलाकर,

मन में प्रेम ही जागे॥


प्रेम रस का बहे झरना,

भीगे तन मन सारा।

तेरी मुरली सुनते-सुनते,

लगे जगत ये प्यारा॥

कान्हा आना मेरे अंगना...


लोभ मोह की काली बदरी,

पल में दूर हटाना।

अपने चरणों की धूलि देकर,

मुझको अपना बनाना॥

मन मंदिर में दीप जलाऊँ,

भक्ति फूल चढ़ाऊँ।

तेरे रंग में रंगकर मोहन,

जीवन सफल बनाऊँ॥

कान्हा आना मेरे अंगना...


अहंकार की दीवारें टूटें,

सत्य प्रेम बरसे।

तेरी कृपा से सूखे मन में,

भक्ति के फूल खिलें॥

राधे-राधे नाम की धुन में,

हर पल मन ये गाए।

तेरी छाया में हे गिरधारी,

हर दुख दूर हो जाए॥

कान्हा आना मेरे अंगना,

काम क्रोध मद भागें।

प्रेम रस का बहे झरना,

मन में प्रेम ही जागे॥

      - डॉ सत्येंद्र सिंह , पुणे

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

1 Comments

  1. सत्येंद्र सिंह जी, मधुर भक्ति रचना। हार्दिक बधाई🎉🎊

    लतिका

    ReplyDelete
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