सप्तदिवसीय श्रीमद भागवत कथा आयोजित
इटारसी । केवल राजा परीक्षित को पता था उनकी मृत्यु 7 दिन में हो जाएगी उन्होंने महल छोड़कर परम संत सुकदेव जी से भागवत सुनी। और परम लोक को प्राप्त हुए। शहर के द्वारकाधीश मंदिर में राजाराम सेन इंदिरा बाई सेन आशीष सेन झलक सेन परिवार के द्वारा आयोजित सप्तदिवसीय श्रीमद भागवत कथा के तृतीय दिवस की कथा के दौरान कथा व्यास भागवत भूषण पंडित श्री सौरभ दुबे ने कहा कि किसी व्यक्ति को यह पता चले कि उसकी मृत्यु सातवें दिन हो जाएगी तो वो क्या करेगा, क्या सोचेगा? राजा परीक्षित ने यह जान कर उसी क्षण अपना महल छोड़ दिया। मृत्यु तो निश्चित है पर कब होगी, ये किसी को भी नहीं पता। तो ऐसे में आप जीवित रहते हुए अपने समय को क्यों बर्बाद करते हैं?
कथा व्यास पंडित सौरभ दुबे ने कहा कि मानव जीवन का मोल पहचानें और इसको प्रभु के चरणों में सौंप दें। इस से निश्चित ही कल्याण होगा। भगवान अपने बारे में मानव से हुई भूल को तो भुला सकते हैं लेकिन संतों को लेकर की गई भूल के दुष्परिणाम से वह भी नहीं बचाते। उन्होंने कहा कि भगवान मानव को जन्म देने से पहले कहते हैं ऐसा कर्म करना जिससे दोबारा जन्म ना लेना पड़े। मानव मुट्ठी बंद करके यह संकल्प दोहराते हुए इस पृथ्वी पर जन्म लेता है। जीवन और मृत्यु शाश्वत सत्य है । इसको कोई मिटा नहीं सकता।
पंडित दुबे ने कहा कि प्रभु भागवत कथा के माध्यम से मानव का यह संकल्प याद दिलाते रहते हैं। भागवत सुनने वालों का भगवान हमेशा कल्याण करते हैं। भागवत में कहा गया है जो भगवान को प्रिय हो वही करो, हमेशा भगवान से मिलने का उद्देश्य बना लो। जो प्रभु का मार्ग हो उसे अपना लो, इस संसार में जन्म-मरण से मुक्ति भगवान की कथा ही दिला सकती है। तृतीय दिवस की कथा में पंडित श्री दुबे ने ध्रुव चरित्र प्रहलाद चरित्र, विदुर चरित्र की कथा के माध्यम से बताया की जब मन निर्मल होता है, अंतःकरण शुद्ध होता है तो निश्चित ही भक्त को भगवान की प्राप्ति हो जाती है। बड़ी संख्या में महिला और पुरुष श्रीमद् भागवत की कथा का श्रवण करने श्री द्वारकाधीश बड़ा मंदिर पहुंच रहे हैं। कथा समाप्ति के पूर्व कथा व्यास पंडित सौरभ दुबे का सेन समाज के नगर अध्यक्ष धीरेंद्र सराठे , ओम सेन , राकेश सेन , राजेश सराठे , अनिल सेन , कैलाश सेन अशोक सराठे एवम
महिला मंडल से मीना सराठे, ज्योति सराठे ने पुष्पहार से स्वागत किया। सेन समाज की ओर से शाल श्रीफल महाराज जी को भेंट किया।
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