काव्य :
गणित और जिंदगी
गणित का नहीं है कोई तोल,
ज़िंदगी में इसका बहुत ही मोल।
बातें करो तो सबसे तोल,
वरना ना रह जाएगा मोल।
गणित में होता जीरो भी गोल,
किसे समझाएं गणित और जीवन का मोल।
जोड़-घटाव सिखाता है जीवन,
जीवन बनता जिससे उपवन।
गिनती में छुपे सपनों के रंग,
इसी से चलता दुनिया का ढंग।
कभी पहाड़े, कभी सवाल,
गणित बनाता बुद्धि कमाल।
समय, दूरी, रिश्तों का मेल,
जीवन में चलता इसका खेल।
सच में गणित का नहीं कोई तोल।
अंकों में छिपा जीवन अनमोल ।
- प्रतिभा दिनेश कर
विकासखण्ड सरायपाली
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