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बस्तर में बदलाव की बयार . सत्य प्रकाश , नयी दिल्ली


 

बस्तर में बदलाव की बयार

.  सत्य प्रकाश , नयी दिल्ली 

        बस्तर में 'बदलाव की बयार' है और मध्यभारत का यह क्षेत्र नक्सली हिंसा के दौर से निकलकर शांति, सुरक्षा और चौमुखी विकास की ओर बढ़ रहा है। स्थानीय वन लघु उपज का मूल्यवर्धन कर आदिवासियों को रोजगार से जोड़ा जा रहा है और बस्तर की कला, संस्कृति और प्राकृतिक सुंदरता को पर्यटन हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। पिछले कुछ समय में शासन-प्रशासन के प्रयासों से बस्तर की तस्वीर तेजी से बदली है। बस्तर को अब काफी हद तक नक्सल मुक्त घोषित किया जा चुका है। 

मार्च 2026 तक की रिपोर्टों के अनुसार, सुरक्षा बलों के बढ़ते प्रभाव के कारण बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है और मुख्यधारा में लौटे हैं। कभी नक्सलियों का गढ़ रहे जगरगुंडा, किस्ताराम और गोलापल्ली जैसे क्षेत्र अब सड़क मार्ग से जुड़ चुके हैं। 'मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा' के माध्यम से अब दूरस्थ गांवों तक नियमित बसें चल रही हैं, जिससे कई दिन का सफर घंटों में सिमट गया है। दशकों से बंद पड़े स्कूलों को फिर से खोला गया है। 'छू लो आसमान' और 'लक्ष्य' जैसे अभियानों से आदिवासी युवाओं को शिक्षा के नए अवसर मिल रहे हैं। साथ ही, 'मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान' के तहत घर-घर जाकर ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच की जा रही है। 'नियद नेल्ला नार' योजना के तहत नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के गांवों में बिजली, स्वच्छ पेयजल, राशन दुकानें और एटीएम जैसी सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। जगरगुंडा जैसे क्षेत्रों में अब ग्रामीण मनरेगा का पैसा एटीएम से निकाल रहे हैं। 

बस्तर क्षेत्र में केंद्र सरकार की ओर से आदिवासी समुदायों के उत्थान और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। मई 2026 तक की अद्यतन जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री जनमन वर्तमान में सबसे महत्वपूर्ण अभियान है, जिसका उद्देश्य विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों जैसे अबूझमाड़िया और कमार जनजातियों का विकास करना है। क्षेत्र में दूरस्थ क्षेत्रों में सुरक्षित आवास, स्वच्छ पेयजल और 2,400 किमी से अधिक लंबी सड़कों की स्वीकृति मिली है। छत्तीसगढ़ को 100 पुलों के निर्माण के लिए लगभग 375 करोड़ रुपए की स्वीकृति मिली है, जो बस्तर के दुर्गम गांवों को मुख्यधारा से जोड़ेंगे। 

आकांक्षी जिला कार्यक्रम बस्तर संभाग के अधिकांश जिलों जैसे दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा और नारायणपुर आदि इस कार्यक्रम का हिस्सा हैं। हाल ही में नीति आयोग ने बस्तर जिले को शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन के लिए तीन करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि से पुरस्कृत किया है। स्वास्थ्य कार्यक्रम के माध्यम से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार हुआ है और संस्थागत प्रसव दर में वृद्धि और कुपोषण में कमी आयी है।

शिक्षा और कौशल विकास के लिए एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। बस्तर के विभिन्न ब्लॉकों जैसे लोहंडीगुड़ा, बस्तर और दरभा में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए इन स्कूलों का संचालन किया जा रहा है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए प्रवेश प्रक्रिया और परिणाम हाल ही में जारी किए गए हैं। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत युवाओं को पर्यटन और स्थानीय उद्योगों से जोड़ने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना में ग्रामीण क्षेत्रों में पक्के मकानों के निर्माण के लिए 8,500 करोड़ रुपए से अधिक का आवंटन किया गया है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना में बस्तर जिले में अब तक लगभग 1.38 लाख परिवारों को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन प्रदान किए जा चुके हैं, ताकि धुआं मुक्त रसोई सुनिश्चित हो सके। आयुष्मान भारत योजना में प्रत्येक परिवार को पांच लाख रुपए तक का मुफ्त स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान किया जा रहा है। बस्तर के सर्वांगीण विकास के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर 'बस्तर मुन्ने' (अग्रणी बस्तर) जैसे विशेष अभियान भी चला रहे हैं, ताकि योजनाओं का लाभ शत-प्रतिशत लाभार्थियों तक पहुंचे।

बस्तर अपनी प्राकृतिक सुंदरता और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के कारण तेज़ी से एक वैश्विक पर्यटन केंद्र के रूप में उभर रहा है। छत्तीसगढ़ शासन ने पर्यटन और विकास के लिए कई नई योजनाओं और परियोजनाओं की शुरुआत की गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बस्तर को पर्यटन, स्टार्टअप और बुनियादी ढांचे का केंद्र बनाना है। इसके तहत 200 से अधिक सड़कों और 250 से अधिक पुलों का निर्माण प्रस्तावित है। नियद नेल्लानार योजना का स्थानीय दंडमी भाषा में इसका अर्थ "आपका अच्छा गांव" है। 

फरवरी 2025 में शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य सुरक्षा कैंपों के पांच किमी के दायरे में आने वाले गांवों तक बिजली, पानी, सड़क और स्वास्थ्य जैसी 32 कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है।

बस्तर में पर्यटन को प्रोत्साहन के लिए 'वन स्टेट वन ग्लोबल डेस्टिनेशन' योजना के तहत चित्रकूट और आसपास के क्षेत्रों को विकसित करने के लिए 100 करोड़ रुपए का वार्षिक बजट और 75% तक की सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। पर्यटकों को बस्तर की संस्कृति का वास्तविक अनुभव देने के लिए होम-स्टे नीति लागू की गई है। साथ ही, एक लाख से अधिक युवाओं को पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र में कौशल प्रशिक्षण दिया गया है।

छत्तीसगढ़ का बस्तर जिला अपनी अद्वितीय और प्राचीन हस्तशिल्प कलाओं के लिए विश्व स्तर पर प्रसिद्ध है। बस्तर की कलाकृतियां मुख्य रूप से स्थानीय जनजातियों की जीवनशैली, संस्कृति और धार्मिक मान्यताओं को दर्शाती हैं। बस्तर के प्रमुख हस्तशिल्प में ढोकरा या घढ़वा कला है। यह बस्तर की सबसे प्राचीन और प्रसिद्ध धातु शिल्प कला है, जो लगभग 4,000 साल पुरानी 'लॉस्ट वैक्स कास्टिंग' तकनीक पर आधारित है। इसमें मिट्टी के सांचे पर मोम से डिजाइन बनाया जाता है, फिर उस पर मिट्टी की परत चढ़ाकर गर्म किया जाता है ताकि मोम पिघल जाए। खाली स्थान में पिघला हुआ पीतल या कोई अन्य धातु भरी जाती है। इसमें देवी-देवताओं, जानवरों (विशेषकर हाथी), और दीपकों की सूक्ष्म कलाकृतियां बनाई जाती हैं। इस शिल्प को भू संकेतक जीआई टैग प्राप्त है और इसकी मांग अमेरिका, फ्रांस और जापान जैसे देशों में भी है। बस्तर के वनों में मिलने वाली शीशम, सागौन और शिवना जैसी लकड़ियों का उपयोग करके आदिवासी कलाकार शानदार मूर्तियां और सजावटी सामान तैयार करते हैं। लौह शिल्प बस्तर की पहचान है। कोंडागांव और जगदलपुर इसके प्रमुख केंद्र हैं। इसके अलावा टेराकोटा या मृदा शिल्प,शिल्पबांस कला और तुम्बा कला है।

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सत्य प्रकाश

वरिष्ठ पत्रकार

नयी दिल्ली

फोन: 9968289271

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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