काव्य :
करें प्रकृति से प्यार
शर्म न स्वयं पर आए कभी
हम छोड़ें यूं पद चिन्ह
आचरण की मिसाल दें
दिखें शिष्ट और भिन्न
प्रकृति,और पर्यावरण को
करते हम क्यों ,प्रदूषित
पशु भी होते बेहतर हमसे
ना होकर भी शिक्षित
कचरा फेक कर जहां तहां
ना करते उचित व्यवहार
आदत डालें स्वच्छता की
*ब्रज*,करें प्रकृति से प्यार
- डॉ ब्रजभूषण मिश्र , भोपाल
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काव्य
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