काव्य :
बनता मनुज गंभीर
बोया पेड़ बबूल का तो आम कहां से होय
सुसंस्कार ,यदि बो दिए ,तो सोच भी उन्नत होय,
सुस्वास्थ्य जो चाहते,भोजन उत्तम खाएं
मन भी सुंदर तब बनें,सुसंस्कार जब पाएं
करुणा,अश्रु,, सद्भावना,लेते, सब दिल जीत
मन में ऐसे भाव जगें,जब दिल में बसती प्रीत
जीवन में यह प्रयास हो ,बने नेक इंसान
निर्धन, पीड़ित को देखकर,मन करना चाहे दान
भोजन तन को स्वस्थ बनाता,करता स्वस्थ शरीर
संस्कार ब्रज, सत्य, मिलें,बनता मनुज गंभीर
- डॉ ब्रजभूषण मिश्र , भोपाल
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