काव्य :
खुमार में
जिन्दगी काटते हैं,कुछ लोग खुमार में
धन,दौलत ,घमंड के, चढ़े हुए बुखार में
अपने,दोस्त,रिश्ते सब, हैं वे भूल रहे
सोचते ,विचारते नहीं, हैं स्वयं के प्यार में
मशीनी हो रहे वे,घर,घरेलू सामान जुटाते,मात्र
नहीं वास्ता उनका,फूल,पेड़,पत्ते , बहार में
चल देगी जिंदगी,एक दिन यकायक
समय व्यर्थ करते,हैं किस के इंतजार में
ब्रज,संवार ले,जिंदगी,सदुपयोग,कर
न रह व्यर्थ के मद में और खुमार में
- डॉ ब्रजभूषण मिश्र , भोपाल
Tags:
काव्य
.jpg)
