काव्य :
मां प्रकृति हम सबकी जान
मां प्रकृति हम सबकी जान
इसका सदा ही रखें ध्यान
पौधे लगायें पेड़ बनें महान
हरे भरे रखें खेत खलिहान
नव अंकुर फूटें हरे भरे पौधे लगायें
हरियाली से मां प्रकृति का रूप सजायें
न मन में न धरती में पडने दें दरारें
हम बच्चे दीवार रहित जग बनायें
पोलिथिन की जगह कपडे के थैले अपनायें
तुलसी अनेक औषधीय गुणों से भरपूर
भारतीय ऋषि मुनियों के दिव्य अनुसंधान भरपूर
धर में तुलसी का पौधा अवश्य लगायें
जल की हर बूंद बचायें
एकत्व से सदभाव बनायें
इस तरह प्रकृति को बचायें ।
- ऋतेश कुमार साहनी बरेली उत्तर प्रदेश भारत
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