प्रभात साहित्य परिषद,भोपाल की काव्य गोष्ठी संपन्न
भोपाल । राजधानी की चर्चित संस्था प्रभात साहित्य परिषद द्वारा *संकट* विषय पर काव्य गोष्ठी का आयोजन हिन्दी भवन के नरेश मेहता कक्ष में वरिष्ठ साहित्यकार महेश प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में तथा वरिष्ठ साहित्यकार बलराम गुमाश्ता के मुख्य आतिथ्य में एवं वरिष्ठ कवयित्री श्रीमती कुसुम श्रीवास्तव के विशेष आतिथ्य में तथा डॉ.अनीता तिवारी के संचालन में किया गया.
इस अवसर पर पिछली काव्य गोष्ठी की सर्वश्रेष्ठ चुनी गई रचना के लिये रणजीव कुमार झा एवं सुनील चतुर्वेदी तथा श्रीमती ज्योत्सना खोले को सरस्वती प्रभा सम्मान से अलंकृत किया गया.
सरस्वती वंदना के उपरान्त काव्य गोष्ठी के आरम्भ में हरिओम अनामी ने पढ़ा "हर संकट का हल होगा, आज नहीं तो कल होगा ".वहीं कमल सिंह कमल ने पढ़ा " कुदरत के विपरीत गया मानव तू ने क्या पाया है, देख रहा हूँ धरती पर संकट के बादल लाया है ", वहीं प्रदीप कश्यप ने पढ़ा " शाम होते ही सभी दीप जला रखना है, रात का गहरा अंधेरा अच्छा नहीं होता ", वहीं रमेश नन्द ने पढ़ा " प्रभु ने दिया है जो बल तुझको नन्द वो संकट की घड़ियों के दौरान रख " वहीं महेश प्रसाद सिंह ने पढ़ा " संकट में ही समाधान है संत्रास संसार, तूफान की ओर घुमाओ नाविक निज पतवार" वहीं ऐस ऐन शर्मा ने पढ़ा " पश्चिम में थोड़ी आग लगी क्यों संकट घर में मंडराया ,स्वावलंब का अब तक सूरज क्यों आसमान में मुरझाना, किस नीति और नियम ने भारत को कमजोर किया, यह अनुसंधान जरूरी है अब समय ने हमको समझाया " वहीं संतोष सोनी ने पढ़ा "इस सदी का प्रमुख संकट मर रही संवेदना, वह मनुज की कोमली मृदुभावना संचेतना" इनके अलावा राजेंद्र जैन उमेश तिवारी आरोही अंशुमान बी एल गोहिया आबिद काजमी विद्या श्रीवास्तव मनोज जैन मधुर आदि ने भाग लिया.
अंत में अशोक निर्मल ने सभी का आभार व्यक्त किया.
संस्थापक
रमेश नन्द
प्र. सा.परि.,भोपाल
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