काव्य :
गीतिका
सबको गले लगाइये, तज के जात व पात।
एक दृष्टि से देखिये, सबको मेरे भ्रात!
देना है तो दीजिये ,दंड किसी को आप!
किंतु किसी के पेट पर मारें कभी न लात!!
संत साधुओं के लिये, हर ऋतु है मधुमास!
चाहे भीषण ग्रीष्म हो, जाड़ा या बरसात !
इसमें कुछ संशय नहीं, और नहीं संदेह!
निज माता है गुरु प्रथम , प्रथम देव निज तात।।
होते हैं संसार में गुदड़ी में भी लाल ।
कीचड़ में भी उपजते ऐ ऋतेश जलजात।।
- ऋतेश कुमार साहनी बरेली उत्तर प्रदेश भारत
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