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बदौना में अखंड रामायण पाठ, भजन संध्या एवं महाप्रसाद का आयोजन संपन्न


 

बदौना में अखंड रामायण पाठ, भजन संध्या एवं महाप्रसाद का आयोजन संपन्न

मानव के कल्याण में ज्ञान, कर्म, भक्ति के तीन योग मोक्षदायक: आचार्य महेश त्रिपाठी

सागर । विश्व कल्याण की कामना एवं दुनिया में चल रहे वर्चस्व के युद्ध के शमन के लिए श्री ठाकुर बाबा मंदिर प्रांगण बदौना में (मूल हैदराबाद में एक प्रसिद्ध कंपनी में कार्यरत बदौना निवासी शुभम कुशवाहा के मन में जागी प्रेरणा अनुसार) अखंड रामायण पाठ एवं गायक श्री राजू पटेल/धनीराम सेन (मेन पानी), प्रदीप , बलराम ठाकुर, भोला भैया, चंदन पटेल, आकाश पटेल, शंकर भैया, एवं पार्टी के द्वारा भजन संध्या तथा महाभंडारा का आयोजन प्रसिद्ध कथा आचार्य पंडित महेश त्रिपाठी (पूर्व प्राचार्य रजौआ) के मुख्य आतिथ्य में हजारों जनसमूह के मध्य पूजा अर्चन से प्रारंभ हुआ। आकाशवाणी एवं दूरदर्शन कलाकार राजू पटेल की मंडली ने देवी भजनों की मधुर तानों से उपस्थित श्रोताओं को देर रात तक भक्ति भावना में डुबोए रखा।

इस अवसर पर अखिल भारतीय साहित्य संगम मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य महेश दत्त त्रिपाठी ने जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि मानव के कल्याण के लिए ज्ञान, कर्म और भक्ति के 3 योग मोक्षदायक हैं। उन्होंने तुलसी की रामचरितमानस की चौपाइयों, दोहों को शाबर मंत्र निरूपित करते हुए कहा कि "कलियुग केवल नाम अधारा। सुमिरि सुमिरि नर उतरहिं पारा॥"

आचार्य त्रिपाठी ने पुरुषोत्तम मास में कथा श्रवण करने, भगवद्‌भक्त बनने, गीता में भगवान श्रीकृष्ण के वचन सुनाते हुए कहा कि प्रभु के भक्त ईश्वर में अपना मन रमाकर, प्राण अर्पण कर परस्पर, आपस में कथा श्रवण करके अपने होने का बोध कराते हैं एवं संतुष्ट होकर आनंद की अनुभूति करते हैं। प्राचीन भारतीय परंपरा में संतों, ऋषि-मुनियों ने भक्तिभाव से ही ईश्वर का साक्षात्कार पाया है।

प्रसिद्ध प्रख्यात वक्ता आचार्य महेशानंद ने अपने प्रवचनों में कहा कि शब्द ब्रह्म यानी शब्द के द्वारा निरूपण हुई कथा परब्रह्म के प्रकाश को, परमतत्व को जानने व मानने की आत्मसाधना है। श्रोता वक्ता ज्ञान निधि कथा राम की गूढ़। रामचरितमानस आदर्श परिवार की उपासना का उत्कृष्ट ग्रंथ है, जिसमें भगवान राम के धरा पर अवतार लेने पर राक्षसों का वध करने एवं छुआछूत मिटाने के बहाने सनातनी संस्कृति की रक्षा किया था, जो युग-युगांतर तक हमें प्रेरणादायी है। त्रिपाठी ने बदौना वासियों की प्रशंसा करते हुए 'सर्वे भवंतु सुखिनः' का श्लोक अर्थ सहित समझाया।

आचार्य महेश ने मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम और उनकी प्राकट्य कथा को भारतीय जनजीवन की आस्था और विश्वास का केंद्र बताते हुए मानस में समन्यवयी संत तुलसीदास ने ज्ञान, विज्ञान, अध्यात्म, समाज, धर्म, नीति, राजनीति, रामराज्य आदि विषयों पर गंभीर चिंतन करते हुए सभी से आजीवन हरिभजन करने को कहकर मंत्रमुग्ध किया।

इस अवसर पर मुख्य रूप से कवि देवकीनंदन रावत, मुन्ना लाल पटेल, गजेंद्र कुशवाहा (अंजली टेंट हाउस), रामलाल पटेल, लालसिंह, प्रकाश पटेल, श्रीमती मुन्नीबाई, मालतीबाई, क्रांति बाई, गीता पटेल, सोनू /रश्मि पटेल, नवीन पटेल बम्होरी रोंझा, यशवंत रोंझा, गोपाल/मोहिनी पटेल, शुभम कुशवाहा, दीपक पटेल (लौटना), सत्यम, मुस्कान, ज्योति, मनीषा, जानकी, श्यामा, रचना, पिंकी, राधा,ऋषि सहित अनेक बदौना, रजौआ, अर्जनी, आमेट, रतोना के श्रद्धालु धर्मप्रेमी उपस्थित रहे। आभार आयोजक कुशवाहा परिवार के शुभम कुशवाहा ने व्यक्त किया। देर रात तक भजन कीर्तन का आनंद संचालित रहा।

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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