ad

कवि नहीं, मित्रता की एक जीवित परंपरा थे विनोद निगम


 कवि नहीं, मित्रता की एक जीवित परंपरा थे विनोद निगम

नर्मदापुरम । "मुट्ठी भर धूप, दालान भर अंधेरे, यही कुल पास बचा मेरे..." जैसी मार्मिक पंक्तियाँ रचने वाले कवि विनोद निगम भले ही तीन वर्ष पूर्व अपनी अनंत यात्रा पर निकल गए हों, किंतु उनकी कविताएँ, उनकी मित्रताएँ और उनकी स्मृतियाँ आज भी साहित्य प्रेमियों के हृदय में स्पंदित हैं। उनके तृतीय पुण्य स्मरण अवसर पर आयोजित मित्रों द्वारा मित्र के लिए – पुण्य स्मरण प्रसंग-3' भावनाओं, साहित्य और आत्मीयता का एक आत्मीय अनुष्ठान हो गया।

नगर सहित करेली, भोपाल, इटारसी एवं विभिन्न नगरों से आए साहित्यकारों, कवियों और मित्रों ने अपनी उपस्थिति से यह सिद्ध कर दिया कि विनोद निगम केवल एक कवि नहीं, बल्कि मित्रता की जीवित परंपरा थे। उनकी स्मृति में जुटे मित्रों का यह विशाल परिवार उनकी लोकप्रियता और मानवीय संबंधों की ऊष्मा का प्रमाण बना।

इस अवसर पर विनोद निगम की इच्छा के अनुरूप ही शासकीय गृह विज्ञान महाविद्यालय की हिंदी विभाग की सर्वोच्च अंक प्राप्त छात्रा कुमारी स्मिता पाल को गोल्ड मेडल और प्रमाण पत्र प्रदान किया गया यह उनके परिवार के उनके भतीजे श्री प्रशांत निगम के द्वारा उपलब्ध कराया गया। 

कार्यक्रम के मार्गदर्शक पंडित भवानी शंकर शर्मा ने कहा कि विनोद निगम की रचनाएँ समय की सीमाओं से परे जाकर कालजयी साहित्य का रूप ग्रहण कर चुकी हैं। उनकी लेखनी में जहाँ व्यवस्था पर करारा व्यंग्य था, वहीं मनुष्य और जीवन के प्रति गहरी संवेदना भी विद्यमान थी। उन्होंने कहा कि सच्चा साहित्य वही होता है जो अपने रचनाकार के बाद भी जीवित रहे और विनोद निगम का साहित्य इसी श्रेणी में आता है।

अध्यक्षीय उद्बोधन में वरिष्ठ समाज सेवी श्री राकेश फौजदार ने कहा कि विनोद निगम का सान्निध्य अपने आप में एक साहित्यिक अनुभव था। वे सरलता, आत्मीयता और सहज अभिव्यक्ति के कवि थे, जिनकी कविताएँ सीधे हृदय से संवाद करती थीं।

मुख्य वक्ता श्री अशोक जमनानी ने विनोद निगम की कविताओं में निहित सखा-भाव की दार्शनिक व्याख्या करते हुए कहा कि उनकी रचनाओं में मित्रता केवल भाव नहीं, बल्कि जीवन-दर्शन के रूप में उपस्थित है। "ये सारी उम्र गई मित्रों के नाम" जैसी पंक्तियाँ उनके व्यक्तित्व और कृतित्व दोनों का परिचय देती हैं।

करेली से आए वरिष्ठ कवि श्री नारायण श्रीवास्तव ने कहा कि विनोद निगम ने मित्रता को केवल निभाया ही नहीं, बल्कि उसे जीवन का उत्सव बना दिया। श्री श्रीवास्तव जी ने अपनी दो कविताओं का पाठ भी किया lप्रतिष्ठित साहित्यकार डॉ. के. जी. मिश्र ने उनके जीवन के अनेक संस्मरण साझा करते हुए कहा कि विनोद निगम की मित्रता की सीमा किसी नगर या प्रदेश तक नहीं थी; उनका आत्मीय संसार पूरे देश में फैला हुआ था।

कार्यक्रम संयोजक श्री सुरेश उपाध्याय ने उनकी चर्चित रचना "महाकाव्य हम बन न सके" का प्रभावपूर्ण पाठ किया, जबकि भोपाल से आए श्री राकेश दीवान ने "मित्रों के नाम" कविता के माध्यम से उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

 श्री राम परसाई, श्री आनंद नामदेव तथा कु. ऋतु कुलश्रेष्ठ ने विनोद निगम के गीतों की मधुर संगीतमय प्रस्तुतियाँ देकर वातावरण को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम की संपूर्ण रूपरेखा सप्तक मित्र समूह के श्री खेमचंद यादवेश, श्री सुरेश उपाध्याय, श्री रमेश गर्गव, श्री गोपीकांत घोष एवं श्री कमलेश सक्सेना द्वारा तैयार की गई।

आभार प्रदर्शन करते हुए श्री संजय गर्गव ने विनोद निगम की चर्चित पंक्तियाँ— "यारों, लोगों की जुबाँ पर सदियों-सदियों हम ही होंगे" — सुनाकर उपस्थित जनों को भावुक कर दिया। समापन डॉ. नमन तिवारी द्वारा गाए एवं संगीतबद्ध विनोद निगम के गीत की रिकॉर्डेड प्रस्तुति से हुआ।

यह आयोजन केवल एक श्रद्धांजलि सभा नहीं था, बल्कि उस कवि को सामूहिक नमन था जिसने अपनी पूरी उम्र मित्रों, संवेदनाओं और शब्दों के नाम कर दी। उनकी कविताएँ आज भी यह विश्वास जगाती हैं कि सच्चे रचनाकार कभी विदा नहीं होते, वे अपनी रचनाओं में जीवित रहते हैं। 

कार्यक्रम में भोपाल से श्री रघुराज सिंह इटारसी से विनोद कुशवाहा , मिलिंद भाई एवं स्थानीय स्तर पर  नित्य गोपाल कटारे , अजय सैनी , बाबूलाल कदम , महेश मूलचंदानी , राजेश कुलश्रेष्ठ ,डॉ नमन तिवारी श्रीमती रश्मि दीक्षित श्रीमती आशा उपाध्याय श्रीमती श्वेता गोस्वामी श्री राम सेवक शर्मा , वरिष्ठ अधिवक्ता एस एस ठाकुर पूर्व विधायक पंडित गिरजा शंकर शर्मा , नर्मदा प्रसाद सिसोदिया एवं  शहर के गणमान्य नागरिक और साहित्य प्रेमी उपस्थित थे ।

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

Post a Comment

Previous Post Next Post