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प्रतिबंधित मांझे से लहूलुहान होते नागरिक : नागरिक भी करें अपने कर्तव्य का पालन -इंजी. कवि अतिवीर जैन ' पराग ',मेरठ


प्रतिबंधित मांझे से लहूलुहान होते नागरिक : नागरिक भी करें अपने कर्तव्य का पालन 

पुलिस और प्रशासन के भरोसे नहीं रोकी जा सकती मांझे से होने वाली दुर्घटनाएं 

    मेरठ में प्रतिबंधित मांझे की चपेट में आने से 11वीं के एक छात्र का गला कट गया और उसके 32 टांके आए ।  वही बरेली में प्रतिबंधित मांझे की चपेट में आने से नौवीं कक्षा का एक छात्र जो कि प्रदेश के मंत्री का भतीजा भी था, लहूलुहान हो गया ।  जिसकी घंटों सर्जरी चली । यह केवल उत्तर प्रदेश की कहानी नहीं है पूरे देश की कहानी है । देश के अलग-अलग महानगरों में आए दिन प्रतिबंधित मांझे से दुर्घटनाएं होती रहती हैं ।  कई दुर्घटनाओं में पीड़ितों की जान भी चली जाती है।

   सिंथेटिक और नायलॉन से बने चाइनीज मांझा की देश में उत्पादन ,बिक्री और उपयोग पूरी तरह से प्रतिबंधित है ।  एनजीटी ने जुलाई 2017 में इसके उत्पादन, बिक्री, भंडारण और उपयोग पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी थी । इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने इस मांझे की बिक्री और उत्पादन पर रोक लगाई हुई है । मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने इस मांझे  के  निर्माण पर रोक के साथ ही यह भी कहा कि अगर नाबालिग बच्चा, इस मांझे का उपयोग करते हुए पकड़ा गया, तो बच्चे के माता-पिता भी जिम्मेदार माने जाएंगे ।  उत्तर प्रदेश सरकार ने चाइनीस मांझे की चपेट में आने से होने वाली मौतों  को सामान्य दुर्घटना नहीं बल्कि हत्या की श्रेणी में अपराध दर्ज करने के निर्देश दिए हैं । कानूनी रूप से चाइनीस मांझे को बेचने और उपयोग पर ₹5000 का जुर्माना और एक वर्ष का कारावास है ।  इन सब कानून और रोकथाम के बावजूद चाइनीस मांझे का उपयोग नहीं रुक रहा है । क्योंकि आम नागरिक ही इस मांझे का उत्पादन ,बिक्री और उपयोग करने वाला है । निरंतर घटनाएं ,दुर्घटनाएं हो रही है । पुलिस और प्रशासन कहीं पर भी मांझे से दुर्घटना होने पर, दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कुछ दिन खोजबीन करता है , छापेमारी करता है । और उसके कुछ दिनों बाद फिर वही माहौल हो जाता है । पुलिस और प्रशासन को तो इस मांझे की उत्पादन, बिक्री और उपयोग पर रोक के लिए अपनी कार्रवाई करनी ही चाहिए । वही देश के नागरिकों को इस मांझे का उत्पादन और उपयोग करने वालों की जानकारी स्थानीय पुलिस को देनी चाहिए । नागरिकों को अपने बच्चों को ऐसे खतरनाक मंझे को खरीदने से रोकना होगा । जब तक देश के नागरिक अपना कर्तव्य समझकर ऐसे मामलों में खुद आगे नहीं आयेंगे तब तक सिर्फ पुलिस और प्रशासन के भरोसे पर ऐसी दुर्घटनाओं को नहीं रोका जा सकेगा । 

 -  इंजी. कवि अतिवीर जैन ' पराग '

   पूर्व उपनिदेशक, रक्षा मंत्रालय 

  मोबाइल 94569 66722 what's up 

    232/1डी,शिवलोक ,

  कंकर खेड़ा, मेरठ केंट-250001

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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