श्री महालक्ष्मी देवालय स्थापना महोत्सव : करूणाधाम में त्रिदिवसीय सार्वभौम दिग्विजय महायज्ञ पूर्णाहुति के साथ संपन्न
हुई मां महालक्ष्मी की दिव्य आरती
भोपाल । करूणाधाम आश्रम नेहरू नगर भोपाल में पीठाधीश्वर गुरुदेव श्री सुदेश जी शांडिल्य महाराज के सानिध्य में श्री महालक्ष्मी देवालय स्थापना महोत्सव के तहत त्रिदिवसीय सार्वभौम दिग्विजय महायज्ञ पूर्णाहुति के साथ संपन्न हुआ। प्रथम दो दिवस शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए और आखिरी दिन मां महालक्ष्मी की भव्य दिव्य आरती की गई।
विश्व के भूमंडल पर भारत की सनातन वैदिक चिंतन की धारा में सार्वलौकिक-सर्व सामाजिक- सार्वकालिक मंगलकामना, अभ्युदय एवं सुशांति के लिए कर्मकांड के विविध प्रकार ऋषियों द्वारा अनादि काल से संपादित किए जाते रहे हैं। इन अनुष्ठानों में विशेष रूप से भूमंडल पर भारतीय मेधा के बौद्धिक दिग्विजय की कामना सर्वोपरि रही है। इस दृष्टि से दर्शपूर्णमासेष्टि - राजसूय याग - वाजपेय याग अश्वमेध याग-सर्व सामाजिक संवाद याग इत्यादि के प्रयोग इसके उदाहरण हैं। इन यागों के माध्यम से ही सनातन मेधा ने वैश्विक सभ्यता को बुद्धिपूर्वक अपने लोक कल्याणकारी उद्देश्यों को प्रसारित किया है। इस में 5108 वैदिक मन्त्रों से गौ के घृत से आहुति दी गई। करुणाधाम पीठाधीश्वर श्री सुदेश जी शांडिल्य महाराज द्वारा इस सनातन परंपरा के अधीन त्रिदिवसीय सार्वभौम दिग्विजय महायज्ञ करवाया गया। यह त्रिदिवसीय महायज्ञ 23 जुलाई से शुरू हुआ और आज पूर्णाहुति के साथ संपन्न हुआ।
प्रथम दिवस अनुष्ठान में पंचांग प्रयोग, जल यात्रा, अश्व पूजन, मंडप प्रवेश, अपेक्षित चतुषष्ठी योगिनी मण्डल -भद्र मण्डल ग्रह मंडल - रुद्र मंडल की स्थापना, अरणीमंथन द्वारा अग्नि का आधान किया गया। द्वितीय दिवस के अवसर पर नित्य पूजन, ब्राह्मणवरण दक्षिण अग्नि में अग्नि की स्थापना शुक्ल यजुर्वेद के मन्त्रों में वाजपेय - राजसूय - सौत्रामणि - रुद्र सूक्त तथा शुक्ल यजुर्वेद के अध्याय 28.21 एवं 23 से घृत की आहुति, राजसूय यज्ञ के अंतर्गत संध्या को संगीत रूप में मंडप पर तुरीय संगीत-सितार वादन संपन्न हुआ। तृतीय दिवस के अवसर पर नित्य पूजन ब्राह्मण पूजन अश्वमेध मंत्र के मन्त्रों से आहुति हुई। प्रयोग के उत्तरार्ध में अश्व की शोभायात्रा, अश्व पर आरुढ़ यजमान प्रवेश द्वार, द्वार-पूजन सत्कार हुआ। द्वारा से मंडप तक नृत्य प्रस्तुति, मंगल वाद्य सितार वाद्य की प्रस्तुति, तत्पश्चात सिंहासन पर आरुढ यजमान को छत्र चंवर ध्वज सहित धर्म दंड श्रीआचार्य तथा ब्रह्म मंडली द्वारा प्रदान किया गया। अभिषेक तत्पश्चात पूर्णाहुति तथा आरती के साथ यह त्रि दिवसीय अनुष्ठान सम्पन्न हुआ।
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