प्रशासन अकादमी भोपाल में आनंदम की कार्यशाला सम्पन्न
सागर।।मध्यप्रदेश प्रशासन अकादमी भोपाल में "आनंद विभाग का तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन राज्य आनंद संस्थान भोपाल के द्वारा किया गया। मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों से 49 प्रतिभागियों के साथ सागर से आचार्य पंडित महेश दत्त त्रिपाठी (पूर्व प्राचार्य) का भी चयन हुआ। प्रथम दिवस आनंद विभाग के डायरेक्टर सत्यप्रकाश जी ने दीप प्रज्जवलन कर शुभारम्भ किया। प्रशिक्षक अनिल कांवले ने सरस्वती वन्दना प्रस्तुत की। प्रशिक्षक बुन्देला जी ने कहा जीवन का आनंद स्वयं प्रसन्न रहना और आनंद कब कब किस किस कारण से कम होजाता है उस पर प्रतिभागियों से विमर्श किया। प्रशिक्षक अनिल काम्बले ने अलप विराम की व्याख्या करते हुए कहा कि आज हमारे आनन्द का रिमोट कंट्रोल दुसरे के हाथ में है कभी किसी ने प्रशंसा की तो खुशी मिली और कभी बुराई की तो निराशा । अपने आनंद का कण्ट्रोल स्वयं के पास होना चाहिए। जीवन का लेखा लेखा जोखा अल्पविराम शांत समय बचपन से लेकर अब तक किसने मदद की ओर मैने किसकी मदद की। जीवन में आनंद लेने में नहीं छोड़ने में है। प्रशिक्षक रश्मि खरे ने एक मूवी/ फिल्म के माध्यम से बच्चे की सहजता सरलता की देने की कहानी दिखाई। इन्होंने कहा कि हम जब स्वयम से जुड़ेंगे तब स्वयम को जान पाएंगे। तोताराम की तो बहुत सुनी अव आत्माराम की भी सुनें। डॉ प्रेमन्जली ने मौन की शक्ति बताई। इस पर सागर के प्रतिभागी महेश दत्त त्रिपाठी ने कहा कि मौन की शक्ति जीवन की नदी है थोड़ा विचार करें यह नदी कहा सुख गयी। कहा अविरल धारा प्रवाहित हुई। प्रकृति जीवनदायिनी है प्रकृति संरक्षण से ही मानव जीवित है उन्होंने कववता सुनकर सभी को आनंदित किया।
समापन पर विदिशा के प्रिंस मिश्रा, रामजी सिंह, लखनलाल गौर, विकास प्रजापति, मनीष जावरे आदि उपस्थित रहे। देवाशीष विस्वास ने सभी को शुभकामनाएं दी।
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