अंतर्राष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच की मध्य प्रदेश इकाई की जुलाई मास की काव्य चौपाल सम्पन्न
भोपाल । अंतर्राष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच की मध्य प्रदेश इकाई की जुलाई मास की काव्य चौपाल की बैठक, दिनांक 25 जुलाई,2026 को संस्था की उपाध्यक्ष नीलिमा रंजन के आवास पर आयोजित की गई।
जब बारिश और धूप शहर में लुका-छिपी खेल रहे हैं और शहर कभी बारिश के आनंद में डूबा भीगा-सा चहक रहा है और कभी धूप की आगत् पर मुस्कुरा रहा है, तब काव्य चौपाल अपने तय समय से सदस्यों के कविता-रस में डूबते-उतराते बेहद खुशगवार माहौल में हिलोरें ले तो शाम सार्थक हुई-सी प्रतीत होती है।
खास बात यह रही कि आगामी 29 जुलाई को संस्था की सदस्य रानी सुमिता के जन्मदिन का भी अवसर है जिसे 25 जुलाई को काव्य चौपाल के तय दिन सबने गर्मजोशी के साथ, बहुत धूमधाम से, स्नेह से भीगी शुभकामनाएं देकर मनाया।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए संस्था की अध्यक्ष संतोष श्रीवास्तव जी ने न केवल चौपाल का मतलब बताया बल्कि इसे कविता पाठ और सार्थक वार्ताओं के सम्मिश्रण के रूप में आगे बढ़ाने की इच्छा भी जताई।
कार्यक्रम का शुभारंभ रानी सुमिता ने माता-पिता को स्मरण करने के पश्चात अपनी एक दार्शनिक कविता से की।
“मैं हड़प्पा की समकोण
गलियों में घूम रही हूँ
भोर की किरणों सा
स्वच्छ निर्मल जीवन
पाक हंसी तरूण नवयौवन
सहज सरल जीवन
अति सुंदर मनभावन
सुवासित मेरा यह धरा कण...
स्वजन संग अनुपम जीवन दर्शन ..
जीवन के उच्छवास से अभिभूत हो रही हूँ
मैं हड़प्पा की समकोण गलियों में घूम रही हूँ।
युग आते हैं युग गुजर जाते हैं
कालखण्ड के इतिहास में दर्ज हो जाते हैं
वह संपूर्ण वक्त लुप्त हो जाता है
वह संपूर्ण समाज जी चुकता है अपना यौवन”
विनीता राहुरिकर जी ने “चाहत” के अंतर्गत सुकून के पल की आशा करती सुंदर कविता पढ़ी।
“जिम्मेदारियों को कंधे से उतार
खिड़की के पास खड़े होकर
दूर गगन को कुछ पल निहार लूँ
छत पर खड़े होकर ढलती शाम के
सिंदूरी गुलाल को गालों पर लगा लूँ
किसी सुबह को देर तक सोती रहूँ
फिर किसी दोपहर को अलसायी सी
करवटें बदलती रहूँ बिस्तर पर
ज्यादा नहीं ऐ जिंदगी
बस इतनी सी ही तो चाहत है मेरी…”
काव्य चौपाल में शिरकत करते हुए सतीश चंद्र श्रीवास्तव जी ने व्यंग्य के करारे धार से भरी क्षणिकाओं को सुना कर माहौल में मुस्कुराहट भर दिया।
लीक
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“कानून कायदे की,
बेकार सभी सीख,
जहाँ लालच,
वहाँ लीक!”
जनप्रतिनिधि
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“उन्होंने,
जनप्रतिनिधि की भूमिका
इस तरह निभाई,
निधि के प्रति,
अपनी आस्था दिखाई।”
डॉ.क्षमा पांडेय जी ने देश के भविष्य हमारे बच्चों की छवि उकेरती प्यारी कविता सुना कर सभी का मन जीत लिया।
“बच्चे सदा ही देश के होते हैं कर्णधार।
मॉं- बाप के ये लाड़ले
जीवन के हैं आधार।।
सत्प्रेम व प्रकृति की भोली सलोनी सूरत ,
दिखती सदा जो हमको भगवान की सी मूरत।
छल -दंभ व कपट से होते हैं निराधार।।”
कार्यक्रम का संचालन कर रही संतोष श्रीवास्तव जी ने अपनी हास्य रचना से महौल में हंसी की अविरल धार प्रवाहित कर दी।
“एक जमाना था कि मोहब्बत में कबूतर जरूर रहता था
वह न हो तो आशिकों का पैगाम रुका रहता था।
फिर आया डाकिया और काले चोगे वाला फोन
वक्त ने करवट बदली
आभासी दुनिया ने छोटी कर दी वफा की दुनिया”
नीलिमा रंजन जी ने पिता पर एक बेहद भावनापूर्ण कविता सुनाई।सभी उनकी कविता से खुद को जोड़ कर सुन रहे थे।
“तात मेरे!
मेरे खुलते पंखों की उड़ान
मेरे मान का सम्मान! मेरी धरा! मेरे गगन!
मेरी आकांक्षाओं के अधिकोष,
उचित अनुचित आग्रहों के पूरक
स्वचालित टेलर मशीन
मां के पीछे एक अटल स्तंभ।
तात मेरे!
मेरे उड़ते पंखों की उड़ान
मेरी धरा! मेरे गगन!”
अंतराष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच का “काव्य चौपाल” कार्यक्रम प्रत्येक मास की अपनी यात्रा पूरे जोश और उत्साह से तय करता रहा है। इस बार के कविता पाठ के साथ परालौकिक शक्तियों पर चर्चा से सभी नए अनुभवों और विचारों से भी गुजरे।
अनवरत् एक लंबी दूरी तय करते हुए इस वर्ष के जुलाई मास की अपनी गोष्ठी में भी लेखकों, साहित्यकारों और सुधी श्रोताओं की उपस्थिति में एक सफल और लोकप्रिय कार्यक्रम की श्रेणी में अपना स्थान बनाये रखा।
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साहित्यिक समाचार
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