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सुहावने मौसम में साहित्यिक विचार-मंथन : सरोकार साझा मंच का जुलाई माह का आयोजन


सुहावने मौसम में साहित्यिक विचार-मंथन : सरोकार साझा मंच का जुलाई माह का आयोजन

इंदौर । सुहावने मौसम की गोद में बैठकर शब्दों से समाज को टटोलने का काम किया *"सरोकार साझा मंच"* ने। जुलाई माह के इस विशेष आयोजन का शुभारंभ *महिमा शुक्ला* ने सभी साहित्यकारों का आत्मीय स्वागत करते हुए किया। इस बार मंच पर तीन विषय रखे गए - *'दरकते रिश्ते'*, *भक्तिकाल के कवि और काव्य*, तथा *सुहावना मौसम*।

 दरकते रिश्ते - समय की सच्चाई * 
आज के समय में रिश्तों में आती दरारें समाज का सबसे बड़ा सच हैं। इस विषय पर *डॉ. मनोरमा पांडे, अंजली दीवान, महिमा शुक्ला, संगीता चौहान, गायत्री ठाकुर, अनीता झा और सरला मेहता* ने अपनी कहानियों, संस्मरणों और कविताओं के माध्यम से समाज में व्याप्त अंतर्विरोधों को उजागर किया। हर रचना में रिश्तों की टूटन और उन्हें जोड़ने की चाहत दोनों दिखाई दीं।

भक्तिकाल के अमर कवियों कबीर, मीरा बाई, सूरदास, रसखान और तुलसीदास के साहित्य पर *अमिता मराठे, कविता मेहता, माधुरी निगम, करुणा प्रजापति, कविता चौहान, महिमा शुक्ला और सरला मेहता* ने अपने विचार रखे। सभी ने उनके योगदान को याद करते हुए बताया कि कैसे उन्होंने सरल भाषा में समाज को समानता और प्रेम का संदेश दिया।

इस पर *अर्चना त्रिवेदी* ने भक्तिकाल और वर्तमान समय की तुलनात्मक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि दोनों युगों में समानता, न्याय, सुधार और जागरूकता की अलख जगाने का प्रयास हुआ है। भक्तिकाल के संतों से लेकर आज के लेखकों तक - सबकी लेखनी का मूल उद्देश्य समाज को बेहतर बनाना ही रहा है, जिसका प्रभाव आज भी समाज पर स्पष्ट दिखाई देता है।
हरी-भरी प्रकृति सबका मन मोह लेती है। मानसून की इस भीनी खुशबू पर *अंजू मोटवानी, किरण सेठ, मंजु गुप्ता, आशा मुंशी, कृष्णा जोशी, सुरभि शुक्ला और हेमा रावत* ने अपनी रचनाओं से मौसम के सौंदर्य और रोमांच को मधुर स्वरों में प्रस्तुत किया।
तीनों विषयों के माध्यम से यह स्पष्ट हुआ कि साहित्य हर युग में समाज का दर्पण रहा है। चाहे रिश्तों की बात हो, भक्ति की हो या प्रकृति की - शब्द हमेशा हमें जोड़ते हैं।
अंत में संगीता चौहान ने सभी का आभार व्यक्त किया।
देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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