पीतल की तिजोरी की चोरी नाटक का मंचन एवं लघुकविता काव्य ग़ोष्ठी संपंन्न
भोपाल । अखिल भारतीय कलामंदिर संस्था एवं कलाश्री नाटक अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में “पीतल की तिजोरी की चोरी” नाटक का मंचन किया गया। कला मंदिर के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ गौरीशंकर शर्मा ‘गौरीश’ द्वारा लिखित यह नाटक विश्व संवाद केंद्र के हाल में मंचित हुआ। कहानी में मेज़बान डॉक्टर गौरी शंकर शर्मा ‘गौरीश’ के निवास पर एक काव्य गोष्ठी का आयोजन हो रहा था जिसमें देश के कई मूर्धन्य कवि और कवित्रियां शामिल हुए। कविता पाठ के दौरान उनके घर से एक पीतल की तिजोरी की चोरी हो जाती है, घर के स्वामी को जब यह पता लगता है कि उनके घर से पीतल की तिजोरी की चोरी हो गई है तब उनको बहुत अफसोस होता है । और मामला शिवाजी नगर पुलिस थाने में रिपोर्ट किया जाता है। पुलिस की तत्परता से चोरी का पता लगाया जाता है और शंका के आधार पर कवयित्री एवं उसके पति को हिरासत में लिया जाता है। कढाई से पूछताछ करने पर कवयित्री चोरी कबूल कर लेती है और तिजोरी बरामद की जाती है। जब थाने में वह तिजोरी खोलकर देखी जाती है तब कवयित्री बताती है कि इसमें कोई सोने चांदी हीरे जवारत नहीं थे बल्कि सनातन धार्मिक पुस्तकें एवं एक कविताओं की डायरी मिली, जिसको कि फरियादी कवि डॉ. गौरी शंकर शर्मा ‘गोरीश’ अपनी मूल्यवान निधि बता रहे थे, कि उनके जीवन की अब तक संचित मूल्यवान पूंजी है । क्योंकि उसमें सनातन संस्कृति से संबंधित किताबें थी जो कवयित्री चोरी कर ले गई थी। इन पुस्तकों से उसका हृदय परिवर्तन होता है और वह भविष्य में इस तरह की कोई गलती न करने की शपथ लेती है। फरियादी डॉक्टर गौरीश द्वारा उसे क्षमा कर दिया जाता है, और मामले का प्रसन्नता पूर्वक पटाक्षेप होता है । नाटक में प्रमुख रूप से किरदार निभाने वालों में डॉक्टर गौरी शंकर शर्मा ‘गौरीश’, श्रीमती सरोज लता सोनी, श्री व्ही.के. श्रीवास्तव, श्रीमती नम्रता श्रीवास्तव नमिता, श्री उमाशंकर दुबे मनमौजी, श्री भंवरलाल श्रीवास, एवं नाटक के पात्र कवियों में डॉक्टर प्रकाश बरतूनिया श्री हरिवल्लभ शर्मा ‘हरि’ काव्य ग़ोष्ठी संचालक, डॉक्टर मनोरमा पंत, श्रीमती सीमा हरि शर्मा ने प्रमुख भूमिकाएं निभायीं। सूत्रधार के रूप में डॉ. प्रभात पांडेय, श्रीमती सीमा शिवहरे एवं डॉक्टर वर्षा ढोबले, ने भूमिका निभायी।
दूसरे दौर में नाटक के उपरांत लघु कविता गोष्ठी का आयोजन हुआ , जिसमें अध्यक्षता डॉक्टर गौरी शंकर शर्मा गौरीश ने की, मुख्य अतिथि डॉक्टर प्रकाश बरतूनिया एवं विशिष्ट अतिथि डॉक्टर मोहन तिवारी आनंद श्री सुरेश पटवा हरिवल्लभ शर्मा एवं श्री अशोक धामनिया मंचासीन रहे। कार्यक्रम में डॉक्टर अनीता तिवारी के संचालन में 60 से अधिक कवियों ने काव्य पाठ में भाग लिया । प्रमुख रूप से श्री अरविंद मिश्रा, श्री पुरुषोत्तम तिवारी सहित्यार्थी, श्री कमल किशोर दुबे, श्री शिव कुमार दीवान, डॉक्टर साधना शुक्ला, श्री उमेश तिवारी आरोही, डॉ मृदुल त्यागी, श्रीमती मंजू पटवा, श्री रमेश चंद्र जोशी, श्री नरेंद्र सिंह राजपूत,श्री विष्णु गर्ग, श्री राकेश कुमार त्रिवेदी, श्री आदित्य हरि गुप्ता, डॉ रंजना शर्मा, क्षमा निमोरे, डॉक्टर अनीता चौहान, श्री जगदीश कौशल, श्री अतुल शर्मा, श्रीमती भारती शर्मा, श्री शिखर शर्मा श्री लक्ष्य शर्मा, श्री वीरेंद्र शर्मा श्रीमती ज्योत्सना खोले, श्री हरिओम श्रीवास्तव, श्री रामबाबू शर्मा, श्री कैलाश गुप्ता सुमन मुरैना, डॉ. राजेश तिवारी, डॉ सुनील त्रिपाठी निराला, श्री राम मोहन चौकसे, आदि 60 से अधिक कवियों ने कविता पाठ किया। अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ गौरीश ने लघुकविता किसप्रकार की हो विषय पर प्रकाश डाला।अंत में आभार श्री हरिवल्लभ शर्मा ‘हरि’ ने व्यक्त किया।
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साहित्यिक समाचार
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