काव्य :
मंजिल
तुम अपनी राह चलो, मंज़िल मिल ही जाएगी,
धैर्य की हर एक डोरी, सफलता से जुड़ जाएगी।
औरों पर ध्यान न दो, नहीं तो बात बिगड़ जाएगी,
अपने कर्म की ज्योति से, हर अँधेरी रात ढल जाएगी।
जो चलते हैं लक्ष्य लिए, वे रुकना जानते नहीं,
आँधियाँ लाख आएँ मगर, हिम्मत कभी हारते नहीं।
लोग कहेंगे, लोग हँसेंगे, यह दुनिया की रीत पुरानी,
सच्चा पथिक वही कहलाए, जिसकी अडिग रहे कहानी।
काँटों से मत घबराना, फूल भी वहीं खिलेंगे,
मेहनत के पावन पथ पर, सपने एक दिन मिलेंगे।
ईर्ष्या, भय और संशय को, मन से दूर हटाना,
अपने विश्वास की लौ से, जीवन-पथ जगमगाना।
समय स्वयं झुक जाएगा, जब कर्म तुम्हारा बोलेगा,
आज जो तुझको रोक रहा, कल वही तेरा गुण गाएगा।
तुम अपनी राह चलो, मंज़िल मिल ही जाएगी,
सच्चे मन से बढ़ते रहो, हर मुश्किल झुक जाएगी।
- डॉ. सत्येंद्र सिंह
पुणे, महाराष्ट्र
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बहुत सुन्दर सन्देश, आगे बढ़ने की प्रेरणा देती रचना।
ReplyDeleteमंज़िल तक जाने का सकारात्मक दृष्टिकोण देती रचना लिखने के लिए साधुवाद!
ReplyDeleteलतिका