लेखिका संघ के तत्वावधान में कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया
बरेली। लेखिका संघ के तत्वावधान में महानगर कॉलोनी के मन्कुस स्कूल में कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता राजेश गौड़ ने की तथा मुख्य अतिथि रहे कवि इंद्रदेव त्रिवेदी। कवि गोष्ठी का शुभारम्भ दीप्ती पांडे नूतन द्वारा मां वाणी की वंदना से हुआ। गोष्ठी के पहले सत्र में लेखिका संघ की सदस्या कवयित्री नव्या त्यागी ' अंतरा ' की प्रथम पुस्तक ऐतबार का विमोचन मंचासीन कवियों द्वारा किया गया। सभी कवियों ने नव्या त्यागी अंतरा को बधाई दी क्योंकि लगभग 20 वर्ष की उम्र में कविता संग्रह प्रकाशित होना एक बहुत बड़ी बात है। दूसरे सत्र में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें,,
अपनी कविता पढ़ते हुए,,,राजेश गौड़ ने कहा,,,,
यह कसक जो भी आयेगी हालात की। एक कविता बनेगी सवा लाख की। जिस पर सभी ने तालियाँ बजाईं। इंद्र देव त्रिवेदी ने अपनी ग़ज़ल कुछ ऐसे पढ़ी,,,
बिना वजह उत्पात न कर.
खाली पीली बात न कर।
कमल सक्सेना ने प्रेम का सुमधुर गीत पढ़ते हुए अपनी पीड़ा इस तरह व्यक्त की,,,
वेदना ने ज़ब हृदय मंथन किया, काँपते अधरों को हमने सी लिया।
फिर न बन जाये यहाँ मीरा कोई सोचकर ये विष का प्याला पी लिया। जिसे सभी ने सराहा।
संस्था की अध्यक्ष दीप्ती पांडे नूतन ने आरक्षण पर अपनी कविता पढ़ते हुए कहा कि,
आरक्षण से मुझे नहीं कोई आपत्ति.। ये नहीं है किसी के बाप की संपत्ति।
हिमांशु श्रोत्रिय निष्पक्ष ने सामयिक ग़ज़ल पढ़ते हुए कहा कि,,,, खुद से अनजान ज़माने की बात करते हैँ। आसमान सर पर उठाने की बात करते हैँ।
मीरा प्रियदार्शनी ने अपना कृष्ण और मीरा की भक्ति का गीत कुछ ऐसे पढ़ा,,,
मेरे मन में बस गये श्याम.
मीरा पुकारे चारों धाम।
नव्या त्यागी अंतरा ने अपनी कविता ऐसे पढ़ी,,, उसके लिये खुद को इस कदर बदल रखा है कि उसकी आँखों को हमने आईना बना रखा है।
उमा शर्मा ने अपनी कविता इस तरह से पढ़ी,,, ज़ब पाँव तुम्हारे रुक जायें। आँखों में आँसू चुभ जाएँ।
गोष्ठी के आयोजक अनुराग त्यागी ने बेटियों पर अपनी कविता पढ़ते हुए कहा कि,,आँखों का तारा हैँ बेटियाँ. कुदरत की अनमोल सौगात हैँ बेटियाँ। काव्य गोष्ठी का संचालन कमल सक्सेना ने किया.। गोष्ठी में उपस्थित श्रोताओं ने सभी की कविताओं को सराहा और तालियाँ बजाकर सभी का उत्साह बढ़ाते रहे।
नव्या त्यागी के पिता अनुराग त्यागी ने सभी का आभार व्यक्त किया। और सभी को भोजन के लिये आमंत्रित किया।
- कमल सक्सेना कवि गीतकार बरेली
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साहित्यिक समाचार
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