भगवान का सच्चा भक्त वो है जो क्रोध, मान को जीत ले - आर्यिका भावनामति
इटारसी। संसार में सबसे बड़ी शक्ति धन, पद, सत्ता नहीं अपितु सबसे बड़ी शक्ति अपनी आत्मा पर विजय पाने की है। हम दूसरों को जीतने की कोशिश करते हैं लेकिन भगवान का सच्चा भक्त वो है जो क्रोध, मान को जीत ले। जिसने संसार से लड़ना छोड़कर अपने कर्मों से लड़ना सीख लिया है उसकी आत्मा मोक्ष की और कदम बढ़ाने लगती है। भगवान से यह मत कहिए हे प्रभु मेरी समस्या दूर कर दो। बल्कि यह कहिए कि हे प्रभु मुझे इतनी शक्ति दो कि मैं हर समस्या में समता रख सकूं। हर परिस्थिति में अहिंसा धर्म पर अडिग रहूं।
यह उद्गार आर्यिका संघ प्रमुख भावनामति ने व्यक्त किए। वे यहां महावीर भवन में प्रवचन दे रहीं थीं।
उन्होंने कहा, भगवान पार्श्वनाथ हमें केवल पूजन की प्रेरणा नहीं देते बल्कि यह भी संदेश दे रहे हैं कि कैसी भी परिस्थिति हो कभी आत्मा की शक्ति को मत छोड़ो। जब कोई हमारा विरोध करे। जब मन में क्रोध उठे तब भगवान पारसनाथ को नमस्कार करना चाहिए।
उन्होंने कहा, मोक्ष सप्तमी का पावन अवसर हमें संसार के बंधनों से निकालकर आत्मा की परम अवस्था की याद दिलाता है जहां न जन्म है, न मरण है। न दुख है, न कर्म बंधन है।
पैसा, पद, प्रतिष्ठा के पीछे नहीं भागें :
आर्यिका भावनामति ने कहा, अंग्रेजी का पी अक्षर इंसान को बहुत प्रिय है। हम जिंदगी भर पी के पीछे भागते रहते हैं। पी से पति, पत्नी, पुत्र, पुत्री, परिवार, पैसा, पद, प्रतिष्ठा, प्रेम, प्यार, पार्टी इन सब पी के पीछे पड़ते-पड़ते हम पाप करते हैं। यह भी है पी से हमारा पतन होता है अंत में पी से पछतावा मिलता है। पाप के पी के पीछे पड़ने से अच्छा है पारसनाथ भगवान के पी के पीछे पड़ें तो पुण्य भी कमाएं और पाप भी धो सकते हैं।
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