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सूत्रधार साहित्यिक संस्था द्वारा साहित्यकार को जानें पर परिचर्चा सम्पन्न


सूत्रधार साहित्यिक संस्था द्वारा साहित्यकार को जानें पर परिचर्चा सम्पन्न 

हैदराबाद। सूत्रधार साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था, हैदराबाद भारत द्वारा 80वीं मासिक गोष्ठी का ऑनलाइन आयोजन किया गया। संस्थापिका सरिता सुराणा द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार यह गोष्ठी दो सत्रों में आयोजित की गई। तृप्ति मिश्रा द्वारा सरस्वती वन्दना प्रस्तुत करने के साथ ही प्रथम सत्र आरम्भ हुआ। तत्पश्चात् अध्यक्ष ने उपस्थित सभी साहित्यकारों का शब्द पुष्पों से स्वागत एवं अभिनन्दन किया और संस्था द्वारा संचालित साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों की संक्षिप्त जानकारी प्रदान की। उन्होंने कहा कि संस्था द्वारा संचालित साहित्यिक शृंखला- 'साहित्यकार को जानें' के अन्तर्गत अब तक हम हमारे पूर्ववर्ती 62 साहित्यकारों के रचना-संसार पर, उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर परिसंवाद कार्यक्रम आयोजित कर चुके हैं। आज से हम एक नया कार्यक्रम आरम्भ कर रहे हैं, जिसके अन्तर्गत हम हमारे समकालीन साहित्यकारों की रचना यात्रा के बारे में जानेंगे। आज के इस प्रथम कार्यक्रम में नाटककार एवं कवि सुहास भटनागर हमें अपने रचना संसार से अवगत कराएंगे। 
सुहास भटनागर ने अपने उद्बोधन में कहा कि सृजन एक पीड़ादायक प्रक्रिया है। जब वे अपनी पीड़ा को शब्दों में कह नहीं सकते तो वे उसे लिखकर अभिव्यक्त करते हैं। उन्होंने पहले कविता और फिर कहानी लिखना शुरू किया। हस्ताक्षर कविता से उनका यह सफर शुरू होकर 'कथा हस्तिनापुर की' तक जा पहुंचा। उसके बाद उन्होंने नाटक लेखन और निर्देशन शुरू किया। अब तक उन्होंने अपने लिखे कई नाटकों का सफलतापूर्वक मंचन किया है। उपस्थित सभी सदस्यों ने इस नये कार्यक्रम की सराहना की और सुहास भटनागर को बधाई दी। 
द्वितीय सत्र में काव्य गोष्ठी का सफल आयोजन हुआ। इसमें सिलीगुड़ी से बबीता अग्रवाल कंवल ने सावन पर अपनी मनमोहक ग़ज़ल प्रस्तुत की और भारती बजाज बिहानी ने सुन्दर भावपूर्ण रचना का पाठ किया। वरिष्ठ गीतकार विनीता शर्मा ने - उड़ता हुआ धुआँ हूँ, जैसे गीत की प्रस्तुति के माध्यम से सबको भावविभोर कर दिया। तत्पश्चात् हैदराबाद से गजानन पाण्डेय, हर्षलता दुधोड़िया, अंशु श्री सक्सेना, बिनोद गिरि अनोखा, अशोक दोशी, के कुमार प्रसन्ना, दर्शन सिंह और तृप्ति मिश्रा ने सावन, भगवान शिव और अन्य समसामयिक विषयों पर काव्य पाठ किया। कटक, उड़ीसा से रिमझिम झा ने भगवान भोलेनाथ पर अपनी स्तुति प्रस्तुत की तो कोलकाता से सुशीला सुराणा ने छात्र आंदोलन से सम्बन्धित रचना का पाठ किया। मुम्बई से नवल किशोर अग्रवाल ने समसामयिक विषयों पर आधारित रचना प्रस्तुत की और पुणे से वरिष्ठ साहित्यकार अजय कुमार सिन्हा ने अपनी क्षणिकाएं प्रस्तुत की। आर्या झा ने अपनी रचना-बरसे हो आज तुम जो बरसात की तरह प्रस्तुत की। अंत में अध्यक्षीय टिप्पणी देते हुए सरिता सुराणा ने सभी सदस्यों की रचनाओं की प्रशंसा की और कहा कि आज की हमारी इस गोष्ठी के दोनों सत्र विविधता पूर्ण रहे। आगे भी हम नवीन प्रयोग जारी रखेंगे। उन्होंने दिवंगत सदस्य संतोष कुमार रजा को याद करते हुए उनके सम्मान में अपनी रचना - तिथियां आती रहेंगी/जाती रहेंगी/कैलेण्डर बदलते रहेंगे/साल दर साल प्रस्तुत की।
तेलंगाना समाचार के सम्पादक के राजन्ना ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति प्रदान की। आर्या झा ने द्वितीय सत्र का संचालन किया और सभी का आभार व्यक्त किया।

रिपोर्ट 
सरिता सुराणा
देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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