साहित्य वाटिका ,इंदौर द्वारा कवि श्री गिरेंद्र सिंह भदौरिया 'प्राण' की स्मृति में काव्यांजलि गोष्ठी संपन्न
इंदौर । साहित्य वाटिका परिवार के सदस्य, छंदों के चितेरे स्व. कवि श्री गिरेंद्र सिंह जी भदौरिया जी की स्मृति में आज दिनांक 25/08/2026 को उनके जन्मदिवस के अवसर पर एक भावपूर्ण काव्यगोष्ठी का आयोजन किया गया।
गोष्ठी की अध्यक्षता श्री विजय अड़ीचवाल जी ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ देवास से श्रीमती अनीता शर्मा जी द्वारा सरस्वती वंदना से किया गया। इंदौर से डॉ. अमृता अवस्थी जी, श्रीमती बिंदु तिवारी जी उपस्थित रहीं।
संचालन डॉ. रागिनी स्वर्णकार शर्मा ने किया।
*गोष्ठी में प्रस्तुत प्रमुख रचनाएँ:*
1. डॉ. अमृता अवस्थी जी द्वारा काव्यांजलि
"छंदों के चितेरे थे, शब्दों के साधक थे,
रसधार बहाने वाले, हिंदी के आराधक थे।
लय में थी सरस्वती, वाणी में था मान,
साहित्य-जगत के उज्ज्वल नक्षत्र— गिरेंद्र सिंह जी ‘प्राण’।"
2. श्रीमती बिंदु तिवारी जी (बिंदु परसाई) द्वारा प्रस्तुति ....
*मायका*
पच्चीस बरस से तो यहीं रह रही थी,
सभी को यही पता बताया स्कूल में, कॉलेज में
यहीं पर तो धम्मा चौकड़ी मचाती थी सहेलियों के साथ
फिर अचानक से एक दिन मुझे पता चला
यह मेरा मायका हो गया और मैं रह गई ठगी-सी।
3. डॉ. रागिनी स्वर्णकार द्वारा ग़ज़ल -
दिल को नज़रों से पढ़ा इसमें इबादत क्या है,
इश्क़ होंठों से जताने की ज़रूरत क्या है
बिक रहे ईमां यहां रोज़ ही बाजारों में,
आज के दौर में इंसां की शराफ़त क्या है
साथ ही वीर-रस के प्रसिद्ध कवि "प्राण" जी की पंक्तियाँ पढ़ कर उन्हें काव्यांजलि अर्पित की ...
"हे पाखण्ड खण्डिनी कविते, तापिक राग जगा दे तू।
सारा कलुष सोख ले सूरज, ऐसी आग लगा दे तू।"
अंत में अध्यक्षता कर रहे श्री विजय अड़ीचवाल जी ने सभी रचनाकारों का आभार व्यक्त किया और स्व. भदौरिया जी के साहित्यिक योगदान को अविस्मरणीय बताया।
Tags:
साहित्यिक समाचार
.jpg)
शानदार👌👍👍👍
ReplyDeleteआभार!!
ReplyDelete